ये भी है घटने की वजह
सीसीएसयू में साल 2016 में पीएचडी के लिए अंतिम बार प्रवेश प्रक्रिया कराई थी। इसके बाद से कोई परीक्षा नहीं हुई है। दरअसल, विवि ने नेट, गेट, जेआरएफ, एमफिल उत्तीर्ण छात्रों को सीधे पीएचडी में रजिस्ट्रेशन करने के लिए 60 फीसदी कोटा तय कर दिया है। इसके अलावा यूजीसी के नियमों के मुताबिक अब पीजी वाले कॉलेज ही पीएचडी करा सकते हैं। शिक्षकों का रिटायरमेंट भी हो रहा है। जिसके चलते पीएचडी की सीटें कॉलेजों में घट गई हैं।
10 साल में सात हजार, तीन साल में 301
कैंपस में साल 2006 से 2016 तक 10 साल में जहां सात हजार पीएचडी अवार्ड हुईं। पिछले तीन साल में सिर्फ 301 ही पीएचडी अवार्ड हुई हैं। इस साल 110, 2018 में 99 और 2017 में 92 ही पीएचडी अवार्ड हुईं। अब तक विवि और कॉलेजों में पीएचडी की बात करें तो 15 हजार के करीब पीएचडी अवार्ड हुईं। जिनमें से विवि की सेंटर लाइब्रेरी में 13915 थीसिस मौजूद हैं।