जिला पंचायत सदस्य के लिए आरक्षण जारी होते ही सत्ताधारी दल में घमासान शुरू हो गया है। एक तरफ जहां जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने बगावती तेवर दिखाए हैं तो वहीं, कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर मजबूत पैरवी के लिए लखनऊ जा डटे हैं।
मनिंदरपाल ने तो मंत्री शाहिद मंजूर का नाम न लेते हुए यहां तक कह दिया है कि पार्टी में परिवारवाद को प्रमुखता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पार्टी को ही नुकसान होगा। आगे की रणनीति के लिए उन्होंने अपने खास समर्थकों के साथ बृहस्पतिवार को बैठक बुलाई है। वहीं, वार्ड-23 के आरक्षित होने पर सपा नेता ओमपाल गुर्जर ने आपत्ति दर्ज करा दी है। कहा जा रहा है कि लखनऊ तक वार्ड का आरक्षण बदलवाने के लिए पैरवी की गई है। वहीं, अभी से शाहिद मंजूर गुट के अलावा डॉ. सरोजिनी और अतुल प्रधान गुट के बीच अध्यक्ष पद के लिए सियासी तलवारें खिंचने लगी हैं।
जिला पंचायत सदस्य के लिए आरक्षण मंगलवार रात को जारी किया गया। आरक्षण में जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह को तगड़ा झटका लगा। वह वार्ड-24 से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। यह वार्ड पिछली चार योजनाओं से अनारक्षित रहा है और इस बार इसके ओबीसी में जाने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन, इस बार भी यह वार्ड अनारक्षित कर दिया गया। जबकि, वार्ड-28 और 27 के अनारक्षित रहने की उम्मीद थी, उन्हें आरक्षित कर दिया गया।
अब सीधे तौर पर उनकी पत्नी के लिए रास्ते खुले हैं और मनिंदर को नया रास्ता चुनना होगा। अपने लिए बंद हुए रास्ते के पीछे मनिंदरपाल सिंह और उनके समर्थक कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर की सियासी दांव मान रहे हैं। ऐसे में उनके समर्थकों द्वारा बृहस्पतिवार शाम को जिलेभर के खास लोगों की एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में हुए निर्णय के बाद ही मनिंदरपाल सिंह अपने पत्ते खोलेंगे। लेकिन, यह तय माना जा रहा है कि वह चुनाव मैदान में जरूर उतरेंगे। समर्थकों का कहना है कि बेहतर छवि के कारण मनिंदरपाल इस बार भी अध्यक्ष पद के सबसे बेहतर उम्मीदवार हैं।
सपा को दे सकते हैं झटका
मनिंदरपाल का कहना है कि यह पूरी तरह परिवारवाद का खेल है, जिससे पार्टी का ही नुकसान होगा। सपा छोड़ने से इनकार करते हुए मनिंदरपाल ने कहा कि वह अनुशासन में रहकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। लेकिन, जो कुछ हुआ है, वह पार्टी से जुड़े किसान और आम आदमी के लिए अच्छा संदेश नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि वह सपा को झटका भी दे सकते हैं। मनिंदरपाल सिंह से इस समय बसपा और भाजपा दोनों ही दलों के नेता संपर्क साध रहे हैं। वैसे भी मनिंदरपाल सिंह पिछला चुनाव भाजपा से जीत कर आए थे और जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए वह बसपा में चले गए थे। जब प्रदेश में सपा सरकार बनी तो वह सपा में आ गए। लेकिन, आज भी उनके संबंध इन दोनों पार्टियों के नेताओं से बने हुए हैं।
ओमपाल ने भी दर्ज कराई आपत्ति
वार्ड-23 से मंत्री शाहिद मंजूर के खासमखास ओमपाल गुर्जर का वार्ड एससी आरक्षित हो गया। ओमपाल गुर्जर ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है। उनका कहना है कि आरक्षण प्रशासनिक प्रक्रिया है और प्रक्रिया के तहत ही आपत्ति दर्ज कराई गई है। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि इस संबंध में लखनऊ तक पैरवी की जा रही है। मंत्री शाहिद मंजूर बुधवार को लखनऊ पहुंच गए और उन्होंने पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री से बात भी की। दूसरी ओर, अतुल प्रधान गुट ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण पर नजरें गड़ा दी हैं। समर्थकों का कहना है कि ओबीसी सीट रहने पर अतुल प्रधान की पत्नी को चुनाव लड़वाया जा सकता है।