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मेरठ: जंबूद्वीप की पावन प्रेरिका ज्ञानमती माता का राष्ट्रपति भवन में हुआ सम्मान, धार्मिक स्थलों के संबंध में राष्ट्रपति से हुई बातचीत

Wed, 17 Nov 2021 01:16 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ/ हस्तिनापुर

सार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में स्थित जैन धर्म के पावन तीर्थ जंबूद्वीप की साध्वी ज्ञानमती माता का राष्ट्रपति भवन में बुधवार को सम्मान किया। उन्होंने अपने बैठक कक्ष में पूज्य माता के साथ  अयोध्या व हस्तिनापुर के धार्मिक स्थलों के विषय में भी बातचीत की।
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साध्वी ज्ञानमती माता का राष्ट्रपति भवन में सम्मान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ से सटी ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में स्थित जैन धर्म के पावन तीर्थ जंबूद्वीप की पावन प्रेरिका साध्वी ज्ञानमती माता का मंगल उद्बोधन भारत गणतंत्र के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के व्यक्तिगत आमंत्रण पर दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जंबूद्वीप के समस्त पदाधिकारी मौजूद रहे।

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जंबूद्वीप के प्रबंधन अधिकारी विजय कुमार जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति भवन दिल्ली में जम्बूद्वीप तीर्थ की प्रेरणास्रोत जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता का मंगल आगमन सम्मान के साथ हुआ। संघ सहित पधारीं पूज्य माता का साउथ कोर्ट के प्रवेश द्वार पर राष्ट्रपति के सचिव ने अभिवंदन किया। इसके बाद गाइड के माध्यम से 350 एकड़ में विकसित राष्ट्रपति भवन के विभिन्न विशेष स्थानों पर समस्त संघ को भ्रमण कराया गया। जिसमें अशोका हॉल, दरबार हॉल, मुगल गार्डन आदि स्थान शामिल रहे।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने परिवार के साथ पूज्य माता को प्रणाम किया। और अपने बैठक कक्ष में आमंत्रित कर लगभग 25 मिनट पूज्य माता एवं उनके साथ प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता व पीठाधीश स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामी से व्यक्तिगत चर्चा करते हुए अयोध्या व हस्तिनापुर के धार्मिक स्थलों के विषय में भी बातचीत हुई। पूज्य माता व स्वामी के द्वारा राष्ट्रपति को जम्बूद्वीप का अत्यंत सुंदर प्रतिकृति चिन्ह भी भेंट किया गया। पूज्य माता के बैठने की व्यवस्था व सम्मान काष्ठ के तख्त व सिंहासन पर की गई। उसके बाद राष्ट्रपति भवन के वाईडीआर हॉल में एक सामूहिक उद्बोधन सभा का आयोजन हुआ। 

साल-2022 को अयोध्या तीर्थ विकास वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की
राष्ट्रपति ने पूज्य माता के साथ पधारे सभी ब्रह्मचारिणी बहनों व अतिथियों से परिचय लिया। उद्बोधन सभा में पूज्य गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माता ने अनेक जनकल्याण व समाज उद्धार की बातों व अहिंसा धर्म पर बल देते हुए देश के लिए अपना सारगर्भित उद्बोधन देकर राष्ट्रपति व उनकी धर्मपत्नी प्रथम महिला और पुत्री के प्रति असीम प्रेम के साथ अपना मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया। इस अवसर पर पूज्य माता ने राष्ट्रपति को जैन धर्म के परिप्रेक्ष्य में अयोध्या का महत्व भी विस्तार के साथ बताया और साल-2022 को शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या तीर्थ विकास वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की।

वहीं राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में पूज्य माताजी की 88वीं जन्मजयंती पर शरदपूर्णिमा महोत्सव को सारे देश द्वारा मनाए जाने का भी उल्लेख किया। और पूज्य माता की 70 वर्षीय साधना का भी उल्लेख कर उन्हें सादर प्रणाम किया अपने उद्बोधन में अहिंसा की महत्ता पर भी विचार व्यक्त किए। कक्ष वार्ता में गौरव के साथ राष्ट्रपति ने 12 वर्ष बाद पूज्य माता की शताब्दी जन्मजयंती मनाने की भी उज्ज्वल भावनाएं व्यक्त की। जंबूद्वीप के प्रबंधन अधिकारी विजय कुमार जैन ने बताया कि ये महान क्षण निश्चित ही देश और जैन समाज के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ पर लिखे जाने योग्य बना है, यह गौरव की बात है।
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