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लहू मांगे इंसाफ: ये पांच लाशें चीख-चीखकर दे रहीं गवाही, पर पुलिस की जांच में हुआ बड़ा खेल, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Fri, 20 Oct 2023 11:22 AM IST
कपिल kapil सचिन त्यागी, अमर उजाला मेरठ

सार

Meerut Blast Case : शायद यही वजह है कि किसी पर आंच न आ जाए इसलिए एफआईआर से बारूद का गोदाम गायब कर दिया गया। लेकिन ये मौतें इंसाफ मांग रही हैं।
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मेरठ विस्फोट मामला: पांच लाशें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऊपर पटाखों का गोदाम। नीचे साबुन फैक्टरी। सैकड़ों किलो बारूद के बीच रोज की रोटी कमाते गरीब। क्या ये सिर्फ हादसा है... नहीं। अगर मौके पर सिर्फ साबुन की फैक्टरी होती और धमाका हो जाता, तो ये हादसा था। लेकिन पटाखों के बारूद की चपेट में आकर पांच लोग मर गए हैं। इससे साबित हो जाता है कि शहर में बारूद का गोदाम का चल रहा था। शायद यही वजह है कि किसी पर आंच न आ जाए इसलिए एफआईआर से बारूद का गोदाम गायब कर दिया गया। लेकिन लहू इंसाफ मांगता है।

 

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मेरठ में अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट। - फोटो : अमर उजाला

पुलिस जिस पटाखे के गोदाम को गायब कर देना चाहती थी, वह खुद पुलिस की लिखा-पढ़ी में मौजूद है। इन पांच शवों के पंचायतनामे में दर्ज है कि मौके पर साबुन बनाने की फैक्टरी व पटाखों का गोदाम था। ये पंचायतनामा सिर्फ इन पांच मजदूरों का नहीं है। यह कानून का भी पंचनामा है।

जिंदा तड़पते रहे मजदूर। - फोटो : अमर उजाला

प्रयाग साह, चंदन, सुनील ठाकुर, अयोध्या राम और रूपन साह की लाशें खामोश रहकर भी इस बात की गवाही दे रही हैं कि उनकी मौत महज सिर्फ एक हादसा नहीं है। ये कानून की भी मौत है। जो काम पुलिस-प्रशासन के बड़े-बड़े आला अधिकारी दो दिन में नहीं कर पाए, वो इन लाशों के पंचायतनामे ने कर दिखाया है।

मेरठ में विस्फोट। - फोटो : अमर उजाला

मौका-ए-वारदात पर मिले सबूत भी इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि वहां पर पटाखों का जखीरा मौजूद था। लेकिन कानून को न मौका-ए-वारदात पर मिले सबूत दिखाई दिए और न ही लाशों का पंचायतनामा।

फैक्टरी में विस्फोट। - फोटो : अमर उजाला
हजारों किलोमीटर दूर से रोजी-रोटी कमाने आए ये मजदूर परदेसी हैं। शायद यही वजह हो कि लोहियानगर में पटाखा गोदाम में हुए धमाके में मरने वाले पांच लोगों को इंसाफ मिलने में इतनी देरी हो रही है। अब तक जो अधिकारी साबुन फैक्टरी में रखे मोबिल ऑयल और फिनाइल आदि की वजह से धमाके की बात कर रहे थे, उनकी इस थ्योरी को खुद पुलिस के पंचायतनामे ने फेल कर दिया है।

विस्फोट के बाद मौके से मिले स्काई शॉट - फोटो : Amar Ujala
लोहियानगर पुलिस ने घटना वाले दिन 17 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर जो अज्ञात लाशों का पंचायतनामा भरा है, उसमें उनकी मौत का कारण पटाखा स्टोर/साबुन फैक्टरी में आग से झुलसना बताया है।

मौके से मिले पटाखे - फोटो : Amar Ujala
वहीं, इसी तारीख को शाम तीन बजकर 50 मिनट पर लोहियानगर पुलिस की तरफ से ही एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसमें पंचायतनामे की सच्चाई को दर किनार करते हुए पटाखा गोदाम का नाम गायब हो गया।

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मेरठ में विस्फोट - फोटो : Amar Ujala
एफआईआर में सिर्फ साबुन फैक्टरी में हुए विस्फोट की वजह से मौत दिखाई गई है। सवाल ये है कि पुलिस पांच घंटे में अपने ही पंचायतनामे को कैसे भूल गई। बृहस्पतिवार को इन अज्ञात लाशों वाले पंचायतनामों पर मृतकों के नाम लिखे गए तो ये सच भी उजागर हो गया।

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