मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (मस्तिष्क संबंधी विकार) है, जो अत्यधिक नशीले पदार्थों के सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने, ब्रेन ट्यूमर और मानसिक सदमे से भी हो सकता है। मरीज को झटके आने पर उसे जूता, मोजा सुंघाने से बचें, इससे और नुकसान होता है। इसका इलाज संभव है। मेडिकल साइंस में इसकी दवाएं मौजूद हैं। समय रहते अगर इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। लिहाजा अंधविश्वास से दूर रहें और इलाज कराएं।
इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। मेरठ में पीएल शर्मा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में हर माह इस बीमारी के 60 से 70 मरीज आते हैं। डॉक्टर बीमारी से बचाव के लिए न सिर्फ इलाज कर रहे हैं, बल्कि काउंसिलिंग कर उनको जागरूक भी कर रहे हैं। अंधविश्वास से दूर रहने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।