नए शहर काजी डा. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी का कहना है कि मुगलकाल से ही पीढ़ी दर पीढ़ी उनके परिवार के लोग शहर काजी बनते आ रहे हैं। वहीं कारी शफीकुर्रहमान का कहना है कि वे हाफिज और मौलवी हैं, शहर काजी पर उनका ही हक बनता है।
शहर काजी को लेकर घमासान चल रहा है। प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के इंतकाल के बाद कुछ लोगों ने डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी की पगड़ी बांधी है तो कुछ ने कारी शफीकुर्रहमान को। दोनों के अपने-अपने दावे हैं। इसके अलावा ईद की नमाज कौन पढ़ाएगा, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है। ईदगाह कमेटी बैठक नमाज पढ़ाने का निर्णय लेगी। शहर काजी ही ईद की नमाज पढ़ाते हैं।
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नए शहर काजी डा. सालिकीन बोले- मुस्लिमों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में हो विज्ञान
नए शहर काजी डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी का कहना है कि हमारे परिवार में शहर काजी बनने की परंपरा मुगलों से चली आ रही है। कई पीढ़ियां तो मुझे याद हैं। मुझ से पहले मेरे वालिद प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी शहर काजी थे। उनसे पहले मेरे दादा जैनुल आबिदीन, उनसे पहले परदादा कारी बशीरुद्दीन और उनसे पहले परदादा के वालिद कारी हादी शहर काजी थे।
डॉ. सालिकीन ने कहा कि मेरी उम्र 32 साल है। मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से कॉमर्स में पीएचडी और फाइनेंस की पढ़ाई की है। फिलहाल मैं पिछले तीन साल से एएमयू में अस्थायी तौर पर पढ़ा रहा हूं। कारी शफीकुर्रहमान को भी शहर काजी की पगड़ी बांधने पर उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना। मुझे मुस्लिम अवाम और शहर के जिम्मेदार लोगों ने चुना है। मैं इसे जिम्मेदारी के साथ निभाऊंगा। मैं शहर काजी के परिवार से हूं और इसी माहौल में रहा हूं। पद संभालने में कोई दिक्कत नहीं होगी। जहां जरूरत महसूस होगी, वहां जिम्मेदार और बुजुर्गों की मदद ली जाएगी। ईद की नमाज हमेशा से शहर काजी पढ़ाते आए हैं, इस लिहाज से इस ईद की नमाज मैं पढ़ाऊंगा। उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश और सोच ये है कि मुस्लिमों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में विज्ञान हो।
कारी शफीकुर्रहमान ने ड्रामा किया है: नायब शहर काजी
नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि कारी शफीकुर्रहमान ने शहर काजी की पगड़ी बंधवाकर ड्रामा किया है। वह पहले भी शहर काजी बनने के ख्वाहिशमंद थे। उन्होंने प्रो. जैनुस साजिद्दीन की भी मुखालफत की थी। दोस्तों और मिलने वालों को बुलाकर पगड़ी बंधवा ली।
कारी शफीकुर्रहमान।
- फोटो : अमर उजाला
प्रो. जैनुस साजिद्दीन ही बेटे को शहर काजी नहीं बनाना चाहते थे: कारी शफीकुर्रहमान
शहर इमाम और कारी शफीकुर्रहमान कासमी का कहना है कि शहर काजी परंपरा से नहीं, बल्कि काबिलियत से बनना चाहिए। परंपरा की भी बात करूं तो कारी हादी प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के परिवार से नहीं थे। मेरी उम्र 70 साल है। सन 1980 से मैं जामा मस्जिद और ईदगाह में तकरीर करता आ रहा हूं।
उन्होंने कहा कि मैंने कुरान हिफ्ज किया है। कारी बना, मौलवी बना और अरबी का कोर्स किया। मुस्लिम समाज के लोगों ने मुझे बुलाकर आपसी सहमति से शहर काजी की पगड़ी बांधी है। डॉ. सालिकीन को शहर काजी बनाया जाना राजनीतिक मामला है। चंद मुट्ठीभर लोगों ने उन्हें चुना है। एक तरफ वालिद का जनाजा था और दूसरी तरफ उन्हें पगड़ी बांधी जा रही थी। कहीं ऐसा होता है। डॉ. सालिकीन अभी बच्चे हैं। वह तो हफ्ते में छह दिन अलीगढ़ रहेंगे, फिर शहर काजी जैसी जिम्मेदारी कैसे संभालेंगे।
मैं प्रो. जैनुस साजिद्दीन के इंतकाल में गया था। डॉ. सालिकीन के सिर पर हाथ रखा। मैंने ही करीब 34 साल पहले प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी को पगड़ी बांधी थी। उनसे कोई इख्तलाफ नहीं था, डॉ. सालिकीन से भी नहीं है, लेकिन शहर काजी जिम्मेदारी वाला पद है। शहर में दो शहर काजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह अवाम को तय करना है कि वह किसे मानेंगे।
ढाई बजे होगी जुमे की नमाज
डॉ. सालिकीन सिद्दीकी ने कहा कि जुमे की नमाज जामा मस्जिद में दोपहर ढाई बजे होगी। यह एलान मरहूम शहर काजी प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी ने किया था। उसी पर कायम रहेंगे।
ईदगाह कमेटी बैठक कर तय करेगी, कौन पढ़ाएगा ईद की नमाज
ईदगाह कमेटी के सदस्य अनस सब्जवारी ने कहा कि ईद की नमाज शहर काजी पढ़ाते आ रहे हैं। जल्द ही ईदगाह कमेटी बैठक करेगी और उसमें तय होगा कि कौन नमाज पढ़ाएगा।