महोबा। दुष्कर्म के साढ़े चार वर्ष पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी ) राकेश कुमार गौतम ने सोमवार को फैसला सुनाया। दोषसिद्ध होने पर दोषी को सात वर्ष के कारावास व 12 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया।
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला 17 जनवरी 2017 को घर थी जबकि पति ड्यूटी करने बीएसएनएल टॉवर महोबा गया था। उसी समय मुराद अली उर्फ मुबारक उसके घर पहुंचा और महिला को जबरन अपने साथ ले गया। इस कार्य में उमेश कुमार यादव ने सहयोग किया। महिला अपने साथ सोने-चांदी के साथ जेवरात भी ले गई। पति ने 18 जनवरी को फोन पर बात की तो पत्नी ने बताया कि मुबारक उसे बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी दे रहा है और जबरन राजीनामा का दबाव बना रहा है। उसके साथ एक अज्ञात व्यक्ति भी है। पति की तहरीर पर पुलिस ने मुराद अली उर्फ मुबारक व उमेश यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया। पीड़िता के बरामद होने पर उसके 164 के बयान दर्ज कराए गए। बयान के आधार पर दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में बढ़ोत्तरी की गई। अभियुक्त उमेश यादव की नामजदगी गलत पाई गई और उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार गौतम ने मुकदमे की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि दोषी मुराद अली उर्फ मुबारक को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।