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आठ दिन पहले भाजपा की होली, रचा इतिहास, विपक्ष का सफाया

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विजयी मुद्रा में पलिया विधायक रोमी साहनी।
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तिकुनिया हिंसा और किसान आंदोलन का नहीं दिखा असर, ध्रुवीकरण का खूब चला इक्का
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पलिया से लगातार तीसरी बार जीते रोमी साहनी, निघासन में शशांक वर्मा की सबसे बड़ी जीत
लखीमपुर खीरी। विधानसभा चुनाव-2022 में भाजपा ने पिछली बार की तरह इस बार भी जिले की आठों सीटें जीतकर दोबारा इतिहास रच दिया। जीत से उत्साहित भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिले भर में होली से आठ दिन पहले ही होली मना डाली और सड़कों पर खूब रंग गुलाल उड़ाया। इस बार सबसे ख़ास बात यह रही कि तिकुनिया हिंसा की वजह से देश-विदेश तक में चर्चित हो चुके लखीमपुर खीरी में इसका कोई असर नहीं दिखा। विधानसभा क्षेत्र में घटना होने के बावजूद निघासन में भाजपा ने सबसे बड़ी जीत हासिल की है। उधर, पलिया से भाजपा विधायक रोमी साहनी ने लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगाई है।
पिछले महीने 23 फरवरी को जब जिले में चौथे चरण का चुनाव हुआ तो सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही थी, जिससे मतगणना के शुरुआती रुझानों में प्रत्याशी काफी कश्मकश में रहे। पलिया और मोहम्मदी के प्रत्याशियों की धड़कनें लगातार बढ़ती रहीं। अलग-अलग राउंड में आ रहे नतीजों में सपा और भाजपा के रुझान में मतों का अंतर काफी कम रहा, लेकिन चढ़ते सूरज के साथ साथ माहौल धीरे-धीरे भाजपा के पक्ष में बनता गया और दोपहर बाद तस्वीर साफ हो गई। पलिया से विधायक रोमी साहनी ने लगातार तीसरी बार जीतकर जहां हैट्रिक लगाई है, वहीं गोला विधायक अरविंद गिरि पांचवीं बार विधायक बने हैं, जबकि निघासन में शशांक वर्मा, कस्ता में सौरभ सिंह सोनू, सदर (लखीमपुर) में योगेश वर्मा, श्रीनगर से मंजू त्यागी, मोहम्मदी से लोकेंद्र प्रताप सिंह लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। धौरहरा से विनोद शंकर अवस्थी ने जीत हासिल की है। उधर, जिले की आठों सीटों पर भाजपा की बढ़त बनती देख मतगणना स्थल पर प्रत्याशियों के चेहरे पर जहां खुशी छलक आई, वहीं समर्थक सड़कों पर होली मनाने के लिये निकल पड़े और जमकर रंग गुलाल उड़ाया।
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ध्रुवीकरण ने भाजपा का बढ़ाया मत प्रतिशत
लखीमपुर खीरी। जिले में पिछले चुनाव से महज 0.49 फीसदी कम रहा मतदान प्रतिशत इस बार भी भाजपा के खाते में गया। पिछले चुनाव में जहां कुल 68.60 फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं इस बार 68.11 फीसदी वोटिंग हुई है। बराबर मतदान प्रतिशत की वजह से भाजपा जहां इससे अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थी वहीं विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ बढ़े जनादेश के रूप में देख रहा था। खास बात ये रही कि इस बार जिन क्षेत्रों में मत प्रतिशत बढ़ा वह ज्यादातर मुस्लिम क्षेत्रों में रहा, जिससे सपा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थी, लेकिन जीत भाजपा को हासिल हुई। संवाद
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