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सप्ताह भर बाद एक बार फिर खरेहटा पहुंचा हाथियों को झुंड

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हाथियों द्वारा तोड़ी गई झोंपड़ी।
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कई बीघा धान की फसल और एक झोंपड़ी उजाड़ी
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मैलानी (लखीमपुर खीरी)। हफ्ते भर के भीतर ही शुक्रवार को दोबारा आए हाथियों ने दुधवा टाइगर रिजर्व की खरेहटा बीट के जंगल से सटे खेतों में कई किसानों की धान की फसल रौंदकर उजाड़ दी।
शुक्रवार की शाम लगभग सात बजे जंगल से सटे खेतों में नेपाली हाथी पहुंच गए। हाथियों ने सुवाबोझ निवासी इखलाक की पांच बीघा, बातून अली की एक, मोबीन की दो, अतीक शाह की छह, उम्मती की पांच और खरेहटा निवासी तोताराम की पांच बीघा धान की फसल उजाड़ दी।
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इसके अलावा सुवाबोझ निवासी लक्खा का एक बीघा गन्ना तहस नहस कर डाला। पीड़ित इखलाक ने बताया कि रात को वनकर्मियों को सूचना दी गई, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। उधर, डीएफओ अनिल पटेल ने बताया कि हाथी पहले जुलाई में आए थे और फिर दोबारा इस इलाके में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों से फसलों को हुए नुकसान का किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा।

जहां हाथियों का आना-जाना है, वहां किसान अभ्यस्थ हो चुके हैं, चूंकि यहां अभी हाथियों का आना-जाना नया है। किसान अपने को सुरक्षित रखते हुए हाथियों के मूवमेंट की जानकारी दें। वन विभाग पूरा सहयोग करेगा। हाथियों से हुई क्षति का नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाएगा। - डॉ. अनिल पटेल, डीएफओ, दुधवा टाइगर रिजर्व

पीड़ित किसान बोले, मुआवजा मिलना मुश्किल

मैलानी। पीड़ित किसानों का कहना है कि हाथियों से हुए नुकसान का मुआवजा मिलना काफी मुश्किल होता है। पीड़ित इखलाक ने बताया कि पिछले साल भी हाथियों ने नुकसान किया था, उसका मुआवजा आज तक नहीं मिला है। मोबीन और अतीक ने बताया कि वे मजदूर पेशा हैं। ठेके पर खेती कर रहे हैं। उधार लेकर फसल में लागत लगाई है। हाथी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में उधारी की रकम कैसे चुुुकाएंगे, यह चिंता सता रही है। बुजुर्ग उम्मती की धान की फसल को भी नुकसान हुआ है। संवाद

नेपाली हाथियों की निगरानी बढ़ी, किसानों को मिलेगा मुआवजा

बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों के उत्पात को लेकर बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि बफरजोन की भीरा और मैलानी रेंज के वन कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जंगल से सटे गांवों में ग्रामीणों को हाथियों से फसल बचाव के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करें। साथ ही जंगल में मौजूद हाथियों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए टीम बनाकर पेट्रोलिंग करें और उनकी गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने बताया कि हाथियों ने जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें वन विभाग की ओर से नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। संवाद
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