बरसात व बाढ़ में फसलों की बर्बादी झेल चुके किसानों के लिए राहत भरी खबर है। जिले के 68 गांवों से आई रिपोर्ट के आधार पर अब वहां कृषि, राजस्व व बीमा कंपनी संयुक्त टीम बनाकर सात साल के दौरान फसल उत्पादन का सर्वे करेंगे। उसी के आधार पर फसल के हुए नुकसान का आकलन करके बीमित किसानों को भुगतान किया जाएगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 14,892 किसानों का फसल बीमा कराया गया था। बीमा कंपनी ने प्रति हेक्टेयर एक किसान से 1250 रुपये प्रीमियम जमा कराया। इस बार यमुना में बाढ़ ,अति बरसात व नहरों के कटान होने से किसानों की खरीफ की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा। जिले के 542 किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने यह कहकर आवेदन खारिज कर दिया कि उन्हें सूचना 72 घंटे के अंदर नहीं मिली।
कंपनी का मानक है कि फसल नुकसान के अंदर 72 घंटे के अंदर सूचना मिले तभी कंपनी, कृषि और राजस्व विभाग की टीम सर्वे करके नुकसान का आकलन करती है। इस बाबत अमर उजाला ने पड़ताल की और शुक्रवार व मंगलवार के अंकों में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। खबर का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने एक टीम गठित कर बीमित किसानों के नुकसान का आकलन कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
पिछले साल उत्पादन का यह रहा औसत
जिला कृषि अधिकारी मनोज गौतम का कहना है कि पिछले साल 28.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान, 14.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बाजरा, 23 क्विंटल ज्वार का औसत निकला था। इसी औसत से पिछले सात साल का आंकड़ा निकाल कर बीमा कंपनी से भुगतान कराया जाएगा।
135 बीमित किसानों ने किया आवेदन
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार फसल बीमा के मुआवजे के लिए जिन 542 किसानों ने आवेदन किए थे। उनके आवेदन पत्रों की भी जांच कराई गई। जांच में सिर्फ 135 किसान ही बीमित निकले। इन किसानों के फसल के नुकसान का भी आकलन निकाला जाएगा।
जिलाधिकारी के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। सात साल के दौरान फसलों का कितना उत्पादन हुआ, उस हिसाब से औसत निकाल कर बीमा कंपनी से किसानों के हुए नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
मनोज गौतम, जिला कृषि अधिकारी