शूटर अरुण मौर्य और आईएसआई एजेंट शैलेश कुमार
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उत्तर प्रदेश का कासगंज जिला माफिया का नया अड्डा बनता दिख रहा है। यहां छह महीने के अंदर दो बड़े अपराधी पकड़े गए हैं। यह दोनों पैसों और पहचान की चाहत में देश और समाज के दुश्मन बन गए। पहला मामला अप्रैल में सामने आया। जब प्रयागराज में अतीक और उसके भाई अशरफ की बीच सड़क कैमरों के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारों में कासगंज निवासी शूटर अरुण मौर्य भी शामिल था। अभी छह महीने भी नहीं बीते कि दूसरा देश का दुश्मन पकड़ा गया। यह पैसों की लालच में भारतीय सेना की खुफिया जानकारी दुश्मन देश पाकिस्तान की खुफिया एंजेसी आईएसएआई को दे रहा था।
इसके बाद भारतीय सेना की जो खुफिया जानकारी (जिसमें महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट आदि के फोटो शामिल हैं) हरलीन और प्रीती को भेज दिए। अप्रैल 2023 से उसे पैसे भी मिलने लगे। उसके पास यह जानकारी कैसे आई इसके बारे में जो पता चला वह चौंकाने वाला था।
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आरोपी शैलेश करीब 8-9 महीने तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं को भारतीय सेना का जवान ही बताता है। उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए फोटो लगी है।
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अब बात करते हैं करीब छह महीने पहले की। महीना था अप्रैल और तारीख थी 15 अप्रैल। आधी रात खबर आई कि प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और भाई अशरफ की हत्या कर दी गई। इसमें जिन तीन शूटरों का नाम सामने आया उसमें एक था अरुण मौर्य। जांच में पता चला कि वह कासगंज जिले का रहने वाला है। वह एक ऐसे परिवार से है जिसके यहां दो वक्त की रोटी बमुश्किल मिल पाती है।
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अरुण खुद भी पानीपत की एक फैक्टरी में सिलाई का काम करता था। इसके बदले उसे 10 हजार रुपये महीने मिलते थे। लेकिन वह महंगे कपड़े, जूते और होटल में रुकने, खाने-पीने का शौकीन था। साथ में काम करने वाले साथी भी उसके रहन-सहन को देखकर हैरान रहते थे। पकड़े जाने के बाद पुलिस जांच में जो सामने आया वह चौंकाने वाला था।
पता चला कि अपराधी प्रवृत्ति का अरुण हमेशा कुछ बड़ा करने की बात कहता रहता था। एक बार सीआईए-टू पानीपत ने उसे चार फरवरी 2022 को कट्टे के साथ गिरफ्तार भी किया था। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने यूपी के भाटी गैंग और लारेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गों से संपर्क किया। इसके बाद लारेंस बिश्नोई से संपर्क करने का लगातार प्रयास करता रहा। पुलिस को उसने बताया कि यह सब वह पैसों और बड़े नाम की चाहत में कर रहा है।