पहला दिन होने से किशोर कम आए। स्कूल-कॉलेज भी खुले थे। धीरे-धीरे संख्या बढ़ेगी। अभी ज्यादातर एलीट क्लास के बच्चों ने टीका लगवाया है। स्कूल-कालेजों में भी इस आयु वर्ग के लिए टीकाकरण किया जाएगा।
किशोरों (15 से 17 साल) के लिए शुरू हुए टीकाकरण अभियान के पहले दिन लक्ष्य के 43 प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन लग सकी। 4600 के सापेक्ष 1987 किशोरों ने टीका लगवाया। अधिकारियों का कहना है कि पहला दिन होने से किशोर कम आए। स्कूल-कॉलेज भी खुले थे।
विज्ञापन
धीरे-धीरे संख्या बढ़ेगी। अभी ज्यादातर एलीट क्लास के बच्चों ने टीका लगवाया है। स्कूल-कालेजों में भी इस आयु वर्ग के लिए टीकाकरण किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज, उर्सला, स्वरूपनगर आदि इलाकों के नजदीक वाले सेंटरों पर संख्या अधिक रही। वहीं घनी आबादी वाले इलाकों के सेंटरों में कम किशोर आए।
वर्ष 2004 में जन्मे किशोर हुए परेशान
वर्ष 2004 में जन्मे किशोरों को लेकर दिक्कत हुई। कम उम्र वाले स्लॉट में उनका पंजीकरण रिजेक्ट हो गया और बड़ी उम्र वाले स्लॉट में हुआ नहीं। अविरल वार्ष्णेय की उम्र 18 साल दो महीने हो गई। इस पर उर्सला के सेंटर से मना कर दिया गया। वह डफरिन गया तो वहां से वापस उर्सला भेजा। इस चक्कर में गरमागरमी हो गई। बाद में उसे टीका लगा। यह स्थिति कई बच्चों के साथ रही। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि धीरे-धीरे वैक्सीनेशन कवरेज बढ़ेगा।