दो माह पहले जिला उद्यान अधिकारी के 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले में न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर विजिलेंस टीम झांसी के इंस्पेक्टर समेत दस लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने परिवादी और साक्षी की बयान दर्ज करने के लिए 17 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
न्यायालय की इस कार्रवाई से मामले में शामिल लोगों में हड़कंप मचा है। गौरतलब है कि शहर के रामनगर में राजपूत इंटरप्राइजेज के नाम से संचालित फर्म के संचालक दीपू सिंह ने उद्यान अधिकारी श्याम सिंह पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।
जिसकी जानकारी विजिलेंस टीम झांसी को दी गई थी। विजिलेंस टीम ने 17 अगस्त 2021 को जिला उद्यान अधिकारी को कार्यालय से रिश्वत लेते पकड़ा गया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद कर्मचारी संगठनों ने विजिलेंस टीम पर जबरन कार्रवाई का आरोप लगाया था।
कोतवाली पुलिस व एसपी को घटना से अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद राजकीय बहुउद्देशीय इकाई के प्रभारी सुलेमान खान ने न्यायालय में वाद दायर कर कार्रवाई की मांग उठाई थी।
प्रभारी ने सीसीटीवी के फुटेज प्रमाण के रूप में पेश किए थे। कहा था कि फर्म के संचालक दीपू सिंह ने यूटा के पदाधिकारी व शिक्षक विक्रांत पटैरिया के कहने पर विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई। विजिलेंस टीम ने सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए राजपत्रित अधिकारी को घसीटकर कार में डाला और फर्जी आरोप लगाकर छवि खराब करने का काम किया गया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलका चौधरी ने मामले में परिवाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने फर्म के संचालक दीपू सिंह, सहायक अध्यापक व यूटा के पदाधिकारी विक्रांत पटैरिया, विजिलेस टीम झांसी के इंस्पेक्टर शंभू तिवारी, छह आरक्षी सीताराम शुक्ला, विश्वनाथ, रामकुमार, अजीत कुमार, किरापाल, अवधेश कुमार व चालक शिवमूर्ति के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।