पुलिस ने जांच के बाद उसके खिलाफ एससी, एसटी एक्ट की धारा भी बढ़ा दी और जेल भेज दिया। इसके बाद चकेरी थाने से उसके खिलाफ रंगदारी का मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद दुष्कर्म पीड़िता ने गेस्ट हाउस संचालक के खिलाफ बाबूपुरवा थाने में भी एक मुकदमा धमकी की धारा में दर्ज कराया।
वहीं, वर्ष 2000 में बाबा के करीबी रहे घुरवाखेड़ा निवासी ओमप्रकाश ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव हार गए थे। ग्रामीणों के अनुसार इसी के बाद ओमप्रकाश का करौली सरकार से भी मनमुटाव हो गया था। वर्ष 2003 में चकेरी रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध हालात में उनका शव पड़ा मिला था। हालांकि, उनकी मौत कैसे हुई थी। यह आज तक रहस्य है, लेकिन उस वक्त भी बाबा और ओमप्रकाश के बीच बढ़ी तकरार को लेकर कई तरह की चर्चाएं रही थीं।
लॉकडाउन में बढ़ गए थे सदस्य
सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2020 में कोविड काल से बाबा के आश्रम में आने वाले भक्तों की संख्या 100 से 500 के बीच रहती थी। लॉकडाउन में बाबा ने अपना यू-ट्यूब चैनल बनाया, जिसमें उसके चमत्कार देखकर अचानक से देश विदेश से सब्सक्राइबरों की संख्या चार लाख का आंकड़ा पार कर गया। अब आश्रम मेंं आने वाले लोगों की संख्या एक हजार से ढाई हजार तक पहुंच चुकी है।
यह भी पढ़ें- करौली बाबा का भौकाल: 20 हथियारों से लैस गैंग के साथ चलता है बाबा, तीन साल में खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य