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Kanpur Weather Update: मई में बरसा 38.4 MM पानी, आठ डिग्री लुढ़का पारा, पहाड़ों जैसा हुआ मौसम

Fri, 05 May 2023 09:18 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur Weather: कानपुर महानगर सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पर्वतीय क्षेत्रों जैसा हो गया है। पारा आठ डिग्री तक लुढ़का है। बता दें कि 26 साल में पहली बार मई के महीने में 38.4 मिमी पानी रिकॉर्ड किया गया है।
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कानपुर मौसम अपडेट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में इस बार की मई में इतना पानी बरस गया कि उसने रिकॉर्ड बना डाला। 26 साल में पहली बार मई में 3.4 मिलीमीटर बारिश हुई है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार मौसम विभाग के पास मौजूद 1997 से लेकर अभी तक चार मई का जो डाटा मौजूद है।

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उसके अनुसार अभी तक इतनी बरसात दर्ज नहीं की गई है। बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से इस बार कानपुर में इस महीने पहाड़ों जैसा मौसम हो गया है, जबकि इस महीने शुरुआत से पारा 40 डिग्री से ऊपर रहता है। रात के समय लोगों को ठंड लगने की वजह से पंखा बंद करना पड़ रहा है।
डॉ. पांडेय के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है जब मई में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार की आधी रात से लेकर गुरुवार तड़के पांच बजे तक की बारिश की मात्रा 38.4 मिमी रिकॉर्ड की गई है।

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बारिश और ओले पड़ने की घटनाएं संभावित
वहीं, अधिकतम पारा आज के सामान्य तापमान से 8.9 डिग्री कम रहा। दिन का तापमान 30.4 और न्यूनतम 19.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। चार मई के सामान्य तापमान से पारा 4.2 डिग्री कम रहा। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार बारिश और ओले पड़ने व तेज गरज साथ बिजली चमकने की घटनाएं इसी माह और भी संभावित हैं।

चक्रवाती हवाओं के कारण है मौसम में परिवर्तन
आठ मई तक मौसम में इसी तरह का बदलाव रहेगा। बीच-बीच में दिन में धूप निकलेगी, लेकिन सुबह-शाम बादल रहेंगे। दिन में तापमान बढ़ने से बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चक्रवाती हवाओं के एक साथ उठने और उनके टकराने की वजह से मौसम में लगातार परिवर्तन बना हुआ है।

फसलों को हुआ है नुकसान
बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। मौसम विभाग का मानना है कि आठ मई तक मौसम के मिजाज में बदलाव की संभावना नहीं है। इधर, तेज बारिश से मूंगफली, मूंग, खीरा, तुरई, अरबी समेत कई फसलों खराब हुई है। गेहूं की मड़ाई का काम भी ठप हो गया है।
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तीन से चार मई के बीच पिछले वर्षों में बारिश (मिमी में)
  • 1997 में 1.00
  • 2000 में 00
  • 2001 में 1.4
  • 2020 से 2019 तक .. 00
  • 2020 में 0.6
  • 2021 व 2022 में..00
  • 2023 में 38.4
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