अब इन दस्तावेजों को रजिस्ट्री के उन कागजातों से मिलाने की तैयारी की जा रही है, जिन लोगों ने हेराफेरी करके इन जमीनों की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली है। समिति की ओर से इस क्षेत्र में स्थापित मंदिरों और शत्रु संपत्तियों का 1927 से लेकर अभी तक के दस्तावेजों का मुआयना किया गया है, जिसमें बताया गया है कि बड़े पैमाने पर कागजों में हेराफेरी की गई है। यह भी आरोप है कि इस हेराफेरी में मुख्तार बाबा के अलावा एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हैं, जो मुख्तार से जुड़े बताए जाते हैं।