कानपुर। वर्तमान दौर में एविएशन इंडस्ट्री की चुनौतियां ही भविष्य के अवसरों में बदल रही हैं। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, स्टार्टअप के साथ युवा आगे आएं। एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं। यह बातें एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के महानिदेशक जीवीजी युगांधर ने गुरुवार को कहीं। वह बतौर मुख्य अतिथि आईआईटी कानपुर में आयोजित तकनीकी महोत्सव टेककृति और एसआईआईसी के अंतर्गत अभिव्यक्ति कार्यक्रम के शुभारंभ में पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत वैश्विक एमआरओ बाजार का केवल एक फीसदी हिस्सा संभाल रहा है। यह बाजार लगभग 300 अरब डॉलर का है। जीएसटी को 18 से घटाकर पांच फीसदी करने और कस्टम ड्यूटी में कमी कर सरकार भी इस क्षेत्र को गति देने में मदद कर रही है। एयरक्राफ्ट लीजिंग, लाइन मेंटेनेंस, ट्रेनिंग और सिमुलेशन में नए अवसर उभर रहे हैं। उन्होंने विमानन प्रणाली की जटिलताओं पर प्रकाश डाला। कहा कि कंट्रोल, विश्वसनीयता, रखरखाव, मरम्मत और मॉड्यूलर डिजाइन जैसे तत्व अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। एक ही इंजन या सिस्टम का उपयोग कई प्रकार के विमानों में किया जाता है।
हर विमान के लिए अलग सिस्टम विकसित करना व्यावहारिक नहीं होता। भारत ने हजारों विमानों के ऑर्डर दिए हैं। इनकी डिलीवरी अगले छह से 10 वर्षों में होगी। इसके चलते वैश्विक कंपनियां भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं। वे 30 से 40 फीसदी तक पुर्जों की स्थानीय स्तर पर सोर्सिंग कर रही हैं। विमान निर्माण में अब मिश्रित सामग्री का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इससे विमान हल्के और अधिक ईंधन दक्ष बन रहे हैं। हालांकि, इन कंपोजिट्स के कारण दुर्घटना जांच और निस्तारण में नई चुनौतियां भी सामने आई हैं, जो शोध और नवाचार के नए क्षेत्र खोलती हैं।
एवियोनिक्स में काफी अवसर
युगांधर ने कहा कि विमान की कुल लागत का लगभग 70 फीसदी हिस्सा एवियोनिक्स यानी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का होता है। शेष 30 फीसदी लागत संरचना से संबंधित होती है। ऐसे में एवियोनिक्स इंटीग्रेशन, डेटा विश्लेषण और डिजिटल तकनीकों में भारत के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। हवाई अड्डे के जमीनी संचालन में भी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से समय और लागत में कमी आई है। भारत सतत विमानन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय तकनीशियन और इंजीनियर अपनी दक्षता के कारण वैश्विक स्तर पर सम्मानित हैं। देश न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि विश्व के लिए कुशल मानव संसाधन भी तैयार कर सकता है।
अहमदाबाद प्लेन दुर्घटना का सच जल्द आएगा सामने
मिश्रित सामग्री के बढ़ते उपयोग से दुर्घटना जांच और निस्तारण में नई चुनौतियां सामने आई हैं। यह शोध और नवाचार के नए अवसर भी प्रदान करती हैं। पिछले वर्ष हुए अहमदाबाद विमान हादसे पर उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है। जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। विदेशी मीडिया में प्लेन हादसे को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जोखिम हर यात्रा में होता है, लेकिन हवाई यात्रा अब भी सबसे सुरक्षित मानी जाती है। युद्ध में उपयोग हो रहे ड्रोन को लेकर उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के कारण खतरों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।