सोमवार को पुलिस ने बैंक के रीजनल मैनेजर जेके जायस, डिप्टी रीजनल मैनेजर आरसी सचान, शाखा प्रबंधक कमलेश गुप्ता व लॉकर इंचार्ज स्वाति मिश्रा से करीब दो घंटे तक पूछताछ की थी, जिसमें पुलिस को सभी की भूमिका संदिग्ध मिली थी। पुलिस ने उन्हें कुछ समय की मोहलत देकर उनकी बेगुनाही के सुबूत मांगे हैं। इस पर बैंक अफसरों ने पुलिस को पहले 45 दिन फिर छह महीने के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का डाटा सौंपा था। पुलिस को अफसरों से पूछताछ में पता चला कि बैंक ऑफ बड़ौदा के लॉकरों के मेनटीनेंस का ठेका तीन साल पहले गोदरेज कंपनी को दिया गया था। वर्तमान लॉकर इंचार्ज स्वाति मिश्रा ने जनवरी 2022 में बैंक के 540 लॉकरों को पूर्व लॉकर इंचार्ज रतन चमन से टेकओवर किया था। रतन चमन के पहले 2020 में ही कुछ समय के लिए लॉकर इंचार्ज की जिम्मेदारी सौरभ नाम के कर्मचारी के पास भी रही थी, लेकिन रतन चमन के कार्यकाल में तीन बार शिकायत आने पर लॉकरों की मरम्मत कराई गई थी।
इसकी पुष्टि के लिए पुलिस ने गोदरेज कंपनी के बेकनगंज निवासी दो कर्मचारियों अभिषेक राजपूत व संदीप शर्मा के बयान दर्ज करने के लिए थाने बुलवाया। उन्हाेंने भी पूर्व लॉकर इंचार्ज की मौजूदगी में ही लॉकरों की मरम्मत करने की बात कबूली। बयानों की सत्यता जांचने के लिए पुलिस ने वर्ष 2020 के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जो उन्हें मिले नहीं। इस पर बैंक के अफसरों से बुधवार को संबंधित सभी दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने को कहा है। वहीं, रतन चमन को भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जाएगा।