इस मामले में वैभव की तरफ से अधिवक्ता गौरव दीक्षित ने इंदौर जिला कोर्ट में विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की। इस पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट में अभियोजन और बचाव पक्ष की तरफ से अपनी अपनी दलील रखी गई थी।
संबंध सहमति पर आधारित थे या नहीं
कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस प्रकरण में यह तथ्य सामने नहीं आया कि दोनों पक्षों के बीच बने संबंध सहमति पर आधारित थे या नहीं। कोर्ट ने कहा कि जब अभियुक्त की गिरफ्तारी होगी, तो उससे पूछताछ के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। साथ ही अभियोजन की गति आगे बढ़ पाएगी। इस बिंदु के बाद कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता और जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता गौरव दीक्षित ने कहा कि इस आदेश की अपील हाईकोर्ट में दाखिल कर दी गई है।