खागा की माटी में जन्मे चर्चित लेखक व स्तंभकार अमित राजपूत ने विश्व पटल पर दोआबा का सिर ऊंचा किया है। उनका नाम लंदन के हावर्ड वर्ल्ड रिकार्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज किया गया है। उन्हें दुनिया में सबसे युवा स्तंभकार के रूप में चुना गया है।
अमित दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्था के 2014-15 बैच के प्रशिक्षित पत्रकार हैं। उन्होंने ने कॅरिअर की शुरूआत आकाशवाणी दिल्ली में प्रधानमंत्री के विशेष कार्यक्रम मन की बात के साथ की थी। आकाशवाणी में रहते हुए ही इन्होंने एफएम रेन-बो इंडिया व एफएम गोल्ड में भी अपनी सेवाएं दीं।
इसी क्रम में प्रसार भारती द्वारा आकाशवाणी व दूरदर्शन के बीच क्रास चैनल पब्लिसिटी व क्रास मीडिया पब्लिसिटी के गठित प्रोग्राम प्रमोशन यूनिट की स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य भी रहे। मीडिया के अलग-अलग संस्थानों से वह करीब पांच साल तक जुड़े रहे।
मौजूदा समय वह स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हैं। आकाशवाणी से इनका जुड़ाव आज भी विभिन्न कार्यक्रमों के लेखन जैसे रेडियो रूपक, प्रोमो व नाट्य लेखन आदि के जरिए बना हुआ है। उनकी पुस्तक अंतर्वेद प्रवर, जान है तो जहान है और आरोपित एकांत, हाल ही में प्रकाशित हुई हैं।
इन कामों के जरिए बनाई पहचान
अमित राजपूत ने खजुहा में औरंगजेब की पवेलियन में मुगलिया बारादरी युक्त चारबाग की आखिरी निशानी बाग बादशाही पर यात्रा वृत्तांत लिखा। गणेश शंकर विद्यार्थी पर कालजयी रचना अंतर्वेद प्रवर लिखी। कोरोना संक्रमण के दौरान उन्होंने दो पुस्तकें जान है तो जहान है और आरोपित एकांत लिखी।
1857 के स्वाधीनता संग्राम में जनपद का नेतृत्व करने वाले क्रांतिकारी अमर शहीद दरियाव सिंह को पहली बार राष्ट्रीय पटल पर ले जाने का प्रयास किया। इसके अलावा, 13 वर्ष की आयु में 0.22 एयर राइफल की शूटिंग प्रतियोगिता में प्रदेश स्तरीय खेल में हिस्सा लिया।
स्वर्ण पदक जीता। अखिल भारतीय पर्वतारोहण अभियान 2009 में हिस्सा लिया। कुमाऊ हिल ट्रैक किया। कनाडा की प्रतिष्ठित पत्रिका वसुधा में 23 साल की उम्र में लेख लिखा। बनारस घराने की विदुषी गायिका सुचरिता गुप्ता और उनकी टीम ने अमित के लिखे कजरी गीत कसीदाकार को यूनेस्को के मंच पर प्रस्तुत किया।
भावुक हो गए माता-पिता
पुत्र का नाम देश और दुनिया के फलक में दर्ज होने की सूचना मिलने पर माता-पिता भावुक हो गए। अमित के पिता रामसुमेर जनहितकारी इंटर कॉलेज में बाबू हैं और मां कमला देवी गृहणी हैं। अमित अपने पांच भाइयों में चौथे नंबर के हैं। सबसे बड़े भाई प्रदीप बहराइच में सहायक अध्यापक हैं, दूसरे अनिल कुमार प्राइवेट शिक्षक हैं, तीसरे भाई अखिलेश व्यापार करते हैं और अमित से छोटे पांचवें भाई प्रवीण कुमार हैं। पूरा परिवार खागा के नई बाजार मोहल्ले में रहता है। अमित के पिता रामसुमेर ने बेटे के कीर्तिमान पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा बेटे ने अपनी मेहनत से सब कुछ पाया है।