झांसी। इंदौर से आने वाली बसों से प्रतिदिन लाखों रुपये के मोटर पार्ट्स, मोबाइल, ड्राई फ्रूटस बिना ई-वे बिल के टैक्स चोरी करके झांसी लाया जा रहा है। सालों से वाणिज्य कर सचल दल बसों से आने वाले माल को पकड़ने में उदासीन बने हैं। इससे मझोले कारोबारी मालामाल हो रहे हैं।
वाणिज्य कर चेक पोस्ट समाप्त होने के बाद टैक्स चोरी पकड़ने का सारा जिम्मा सचल दल अधिकारियों के हाथों में है। अब लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी भी उनकी है। शासन ने इन दलों का मासिक लक्ष्य जो निर्धारित कर रखा है, जो आठ- दस गाड़ियां पकड़ने पर ही पूरा हो जाता है। इसके बाद जो गाड़ियां पकड़ी जातीं हैं, उनको छोड़ने को लेकर तमाम तरह के आरोप लगते रहते हैं। यही नहीं, महानगर में हर माह करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का माल ट्रांसपोर्टरों द्वारा मंगाया जाता है। इनमें प्रमुख शहरों के मध्य चल रहीं बसें अहम भूमिका निभा रही हैं। बसों से प्रतिदिन लाखों रुपये का माल भेजा व मंगाया जाता है जबकि ट्रांसपोर्टर यह माल तुरंत ही लोडिंग गाड़ियों से उठवा लेते हैं ।
खासकर इंदौर से आने वाली बसों से प्रतिदिन लाखों रुपये की टैक्स चोरी का माल लाया जा रहा है। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। मगर विभाग द्वारा न तो ट्रांसपोर्टरों के यहां और न ही बसों से आने व जाने-वाले माल की जांच की जहमत उठाई जाती है। चूंकि, यह सब खेल मिलीभगत से चलता है, इस कारण उच्च अधिकारी भी जांच करवाने से बचते हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते अभी चेकिंग का काम चल रहा था, लेकिन अब सचल दल अफसरों को बस से आने वाले माल के सख्ती से चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं। वह बोले मैं स्वयं भी औचक निरीक्षण कर जांच करूंगा।
एके सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर (विशेष अनुसंधान शाखा)
ड्राइवरों की कमी का रोना रो रहे अफसर
वाणिज्य कर कार्यालय के पास एक दर्जन चार पहिया सरकारी गाड़ियां हैं। इनमें पांच गाड़ियां सचल दल के पास हैं। जबकि इन गाड़ियों को चलाने के लिए चार ही सरकारी ड्राइवर हैं। जब भी चेकिंग की बात सामने आती है अफसर चालकों की कमी गिनना शुरू कर देते हैं।