झांसी। पंचम वित्त आयोग से नगर निगम को मिलने वाले अनुदान पर सरकार लगातार कैंची चला रही है। इस माह में ही करीब आठ करोड़ की कटौती कर दी गई जबकि निगम पर कर्मचारियों के वेतन-भत्तों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में निगम अफसरों को आशंका सता रही कि अगर कटौती ऐसे ही लगातार जारी रही, तब आने वाले समय में वेतन संकट भी पैदा हो सकता है।
नगर निगम को सरकार पंचम वित्त आयोग के जरिए वित्तीय मदद करती है। सरकार हर माह यह रकम जारी करती है। इस पैसे से ही निगम कर्मचारियों के वेतन-भत्ते दिए जाते हैं। निगम मशीनरी को चलाने के लिए हर माह करीब 11 करोड़ रुपये वेतन-भत्ते आदि पर खर्च होते हैं। उधर, नगर निगम की जल संस्थान, बिजली समेत अन्य कई विभागों पर भारी-भरकम देनदारी है। निगम यह रकम चुका नहीं पाता, इस वजह से शासन इसमें सीधे कटौती करके शेष रकम निगम को जारी करता है। धीरे-धीरे यह रकम बढ़ती जा रही है। निगम अफसरों का कहना है कि कोरोना काल से पहले हर माह करीब 10.45 करोड़ रुपये जारी हुआ करते थे लेकिन, उसके बाद से कटौती बढ़ती जा रही है। जून माह मेें 5.50 करोड़ रुपये दिए गए। उसके बाद सिर्फ 5.95 करोड़ रुपये जारी हुए लेकिन, इस माह सिर्फ 3.05 करोड़ रुपये ही दिए गए।
एक तरफ अनुदान की भारी-भरकम रकम से निगम को हाथ धोना पड़ रहा वहीं, निगम पर कर्मचारियों के देय का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जुलाई माह में कर्मचारियों का इंक्रीमेंट लगाया गया। डीए में भी 11 प्रतिशत का इजाफा हो चुका। इस तरह कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में पिछली बार के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो चुकी लेकिन, दूसरी तरफ शासन की कटौती लगातार बढ़ती जा रही है। आशंका जताई जा रही कि ऐसी परिस्थितियां आगे बनी रहीं तब वेतन देने में लाले पड़ जाएंगे। लेखाधिकारी राजकिशोर का कहना है निगम पर कर्मचारियों का देय का बोझ बढ़ गया है हालांकि कटौती के संबंध में शासन स्तर पर ही निर्णय लिया जाता है।
वित्तीय मदद की गुहार लगाने पर दिया अल्टीमेटम
एक तरफ नगर निगम तगड़ी वित्तीय कटौती से जूझ रहा है लेकिन, इस संबंध में शासन से गुहार लगाने पर कठोर कार्रवाई किए जाने का भी अल्टीमेटम दे दिया गया। स्थानीय निदेशक ने नगर आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य वित्त आयोग की धनराशि बढ़ाए जाने अथवा कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए धन स्वीकृत करने की मांग करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।