झांसी। रेलवे में दो साल से सांसदों की बैठक न होने से बुंदेलखंड की कई यात्री सुविधाओं पर चर्चा नहीं हो पाई है। न तो यात्रियों को जरूरत के हिसाब से ट्रेनों के नए ठहराव स्टेशन मिल पाए और न ही कई स्टेशनों की बुनियादी जरूरतों की मांग साझा हो पा रही है। पिछली बैठक 19 सितंबर 2019 को हुई थी, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने 219 मांगें रेल अफसरों के सामने रखीं थीं, उन पर क्या काम हुआ? यह जवाब भी बैठक न होने के कारण लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
रेलवे ने हर मंडल के अंतर्गत आने वाले लोकसभा व राज्यसभा सांसदों की हर छह महीने में बैठक बुलाने की व्यवस्था कर रखी है। इस बैठक के जरिये जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए सुझाव साझा करते हैं। हालांकि, संसद सदस्य अपनी मांगें पहले ही रेलवे बोर्ड के पास भेज देते हैं, जिनके जवाब रेल अफसर बैठक से पूर्व तैयार कर लेते हैं। बैठक में जनप्रतिनिधि जिन जवाबों से संतुष्ट नहीं होते हैं, उनको अगली बैठक के लिए जोड़ लिया जाता है। मगर पिछले दो साल से इस बैठक का आयोजन नहीं हो पाया है। इससे बुंदेलखंड में रेल सुविधाओं को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। संसद सदस्य भी इस बैठक को लेकर उत्साहित नहीं हैं।
- रेलवे बोर्ड व जोनल मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद सांसदों की बैठक का आयोजन होता है। फिलहाल अभी बैठक को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
मंडल परिक्षेत्र में आने वाले ‘माननीय’
झांसी रेल मंडल भोपाल ट्रैक पर बीना, आगरा ट्रैक पर धौलपुर, कानपुर ट्रैक पर भीमसेन, प्रयागराज ट्रैक पर मानिकपुर तक आता है। मंडल के अंतर्गत मुरैना से सांसद नरेंद्र सिंह तोमर, जालौन उरई से सांसद भानु प्रताप वर्मा, टीकमगढ़से सांसद डॉॅ. वीरेंद्र कुमार, ग्वालियर से सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, महोबा से कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त, सागर से सांसद राजबहादुर सिंह, अकबरपुर से सांसद देवेंद्र सिंह भोले, कर्वी चित्रकूट से सांसद आरके पटेल, भिंड दतिया से सांसद संध्या सुमन राय व झांसी- ललितपुर क्षेत्र के सांसद आते हैं। पिछली बैठक में तीन राज्यसभा सांसद भी थे, जिनका अब कार्यकाल पूरा हो चुका है।
प्रमुख मांगें, जिनकी प्रगति का इंतजार
- झांसी से कानपुर, निजामुद्दीन व भोपाल रूट पर लोकल ट्रेनों का संचालन।
- ललितपुर स्टेशन पर केरला, मंगला, गोरखपुर कुर्ला, कालका शिर्डी एक्सप्रेस का ठहराव।
- चित्रकूट कानपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस को बाराबंकी तक बढ़ाने।
- कानपुर से दुर्ग चलने वाली बेतवा एक्सप्रेस का संचालन प्रतिदिन करने।
- यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में जनरल कोचों की संख्या बढ़ाने।
- रीवांचल एक्सप्रेस को प्रयागराज की जगह बांदा से चलाने।
- महोबा, बांदा, चित्रकूट के प्लेटफार्मों की पटरियों के बीच आरसीसी का निर्माण।
- ताज व गतिमान एक्सप्रेस को खजुराहो तक बढ़ाने।
- शौचालय व मूत्रालयों में साफ- सफाई की उचित व्यवस्था।
- पैसेंजर ट्रेनों में कोचों की संख्या बढ़ाने।