अब नौ गुना बढ़ गई केन-बेतवा लिंक परियोजना की लागत
झांसी। केन-बेतवा लिंक परियोजना करीब 19 साल पिछड़ने से इसकी लागत में भारी-भरकम इजाफा हो चुका है। परियोजना की शुरूआत में अनुमानित लागत करीब आठ हजार करोड़ रुपये ही आंकी गई थी लेकिन, समय बढ़ने के साथ इसकी लागत में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। परियोजना में अभी तक जीएसटी की रकम नहीं जोड़ी गई थी। यह रकम जुड़ने के बाद अब इसकी लागत 75 हजार करोड़ पहुंच चुकी है।
बुंदेलखंड के लिहाज से केन-बेतवा लिंक परियोजना सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है। परियोजना में 77 मीटर ऊंचा एवं 2031 मीटर लंबा बांध मध्य प्रदेश के छतरपुर के दौधन गांव में केन नदी के किनारे बनाया जाएगा। केन नदी का पानी नहर के जरिए बेतवा के बेसिन में छोड़ा जाना है। इससे मध्य प्रदेश के नौ जिलों समेत यूपी के झांसी, महोबा, ललितपुर, बांदा और हमीरपुर को सिंचाई समेत पीने का पानी मिलेगा लेकिन, राजनीतिक अड़चनों के चलते यह 19 वर्ष तक अटकी रही।
वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय इसकी रूपरेखा बनी थी। अगस्त, 2005 में उप्र एवं मप्र सरकार के बीच पहला समझौता हुआ। इसमें केन नदी को पन्ना जिले में प्रस्तावित दौधन बांध से लगभग 221 किमी लंबी केन-बेतवा लिंक नहर के जरिए झांसी के बरुआसागर के पास बेतवा नदी से जोड़ा जाना था। उस दौरान इसकी लागत 8 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी। सबसे अधिक खर्च पुनर्वास पर किया जाना था। डूब के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क को स्थानांतरित किया जाना था। इधर, उप्र एवं मप्र के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया। विवाद के चलते परियोजना लगातार पीछे खिसकती गई। इस वजह से पुनर्वास लागत भी बढ़ती गई। 2015 में जब एक बार फिर दोनों राज्य समझौते के मेज तक पहुंचे तब तक इसकी लागत बढ़कर 37 हजार करोड़ तक पहुंच चुकी थी।
उसके बाद फिर छह साल तक मामला उलझा गया। केंद्र सरकार के दखल के बाद 22 मार्च 2021 को आखिरकार उप्र एवं मप्र जल बंटवारे पर सहमत हुए। अब परियोजना के जमीन पर उतरने का रास्ता करीब साफ हो चुका। ऐसे मेें सिंचाई अभियंता इसकी लागत में 75 हजार करोड़ रुपये आंक रहे हैं। अभियंताओं का कहना है लागत में सीधे 18 फीसदी की जीएसटी जुड़ गई। पुनर्वास खर्च में भारी-भरकम बढ़ोतरी हो गई। ऐसे में लागत का करीब तीस फीसदी बढ़ना तय है हालांकि अभी लागत पूरी तरह तय नहीं हुई है। लागत को लेकर परीक्षण का काम चल रहा है। अधीक्षण अभियंता शीलवंत उपाध्याय का कहना है अभी लागत संबंधी आकलन किया जा रहा है। जीएसटी समेत अन्य की लागत में बढ़ोतरी की वजह से परियोजना की लागत में इजाफा होना निश्चित है।
इनसेट
केंद्र वहन करेगा नब्बे फीसदी लागत
परियोजना की कुल लागत का नब्बे फीसदी बजट केंद्र सरकार वहन करेगा। जबकि शेष दस प्रतिशत धनराशि उप्र एवं मप्र सरकार अपने-अपने पानी के अनुपात में वहन करेंगे। इस लिहाज से दोनों ही राज्यों को इस परियोजना में काफी कम लागत खर्च करनी होगी।