वर्तमान में पारीछा थर्मल पावर प्लांट की चार इकाइयां हैं, जिनसे मांग के अनुसार प्रतिदिन 910 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। वहीं, कोयले की कमी होने पर 510 और 710 मेगावाट बिजली का उत्पादन ही हो पाता है। इससे 400 से 200 मेगावाट की बिजली के उत्पादन में कमी हो जाती है। वहीं, ललितपुर के बजाज पावर प्लांट की तीनों यूनिटों को पूरी क्षमता के साथ चलाया जा रहा है, जिनसे 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन प्लांट के पास सिर्फ पांच दिनों का कोयला ही बचा है। इससे बिजली का उत्पादन कम होने की संभावना है। यदि समय से और कोयला नहीं मिला, तो यूनिट भी बंद हो सकती हैं।
पावर कारपोरेशन ने सभी पावर प्लांटों से मांगी रिपोर्ट
उ. प्र.पावर कारपोरेशन ने भी पारीछा थर्मल पावर प्लांट और ललितपुर के बजाज पावर प्लांट से कोयले की कमी के चलते रिपोर्ट मांगी है। इस संबंध में जल्द ही हल निकलने की संभावना जताई जा रही है।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा हुआ है। बुधवार को सिर्फ एक रैक 3800 टन कोयला मिला है। जबकि 910 मेगावाट बिजली के उत्पादन के लिए प्रतिदिन 16 हजार टन कोयले की जरूरत होती है। कोयले की कमी के कारण बिजली का उत्पादन भी दिन में 510 और रात में 710 मेगावाट किया जा रहा है।
- एम. के. सचान, मुख्य महा प्रबंधक ( पारीछा थर्मल पावर प्लांट)