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गोरखधंधा : बुंदेलखंड में 10 करोड़ का है नकल कारोबार, बदनाम कॉलेजों में गारंटी से होता है 'काम'

Sat, 09 Apr 2022 02:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

कई केंद्र छात्रों से 20-20 हजार रुपये में लेते हैं नकल कराने का ठेका। 25 प्रतिशत केंद्रों के सीसीटीवी कैमरे बंद मिलने से उठे कई सवाल। बदनाम कॉलेज सबको मैनेज करके चलते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बुंदेलखंड में सात जिले। लगभग सवा दो सौ केंद्र। 25 फीसदी कॉलेजों का सीसीटीवी कैमरा बंद रहना यह बताता है कि तमाम तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद बुंदेलखंड में धड़ल्ले से नकल हो रही है। कई केंद्र छात्रों से नकल कराने के एवज में 20-20 हजार रुपये लेते हैं। हर साल बुंदेलखंड में नकल का कारोबार 10 करोड़ रुपये का है। 

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नकल के लिए बुंदेलखंड काफी बदनाम रहा है। पिछले कुछ सालों में यहां पर सख्ती हुई मगर इस बार व्यवस्था फिर बेपटरी हो चुकी है। हाल ये है कि कॉलेजों में कैमरे बंद कराकर सामूहिक नकल हो रही है। बुधवार को फिजिक्स द्वितीय का पेपर लीक होने के बाद तमाम परतें खुलती जा रही हैं। 
बीयू अधिकारियों की पड़ताल में सामने आया है कि लगभग 40 कॉलेजों के कैमरे परीक्षा के दौरान बंद रहते हैं। इसमें से नौ से दस कॉलेज तो ऐसे रहे, जिनके कैमरे कभी खुले ही नहीं। सूत्रों ने बताया कि बुंदेलखंड में करीब 25 कॉलेज नकल कराने के लिए पहले से ही बदनाम हैं। इन कॉलेजों में तो बाकायदा नकल की गारंटी ली जाती है। 
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ये कॉलेज हर छात्र 20 हजार रुपये लेकर अच्छे नंबरों से पास कराने का ठेका लेते हैं। एक केंद्र पर औसतन 200 परीक्षार्थी होते हैं। ऐसे में बुंदेलखंड में नकल का कारोबार लगभग 10 करोड़ रुपये का है। इसी रकम से कॉलेज सबको मैनेज करके चलते हैं। 

जहां पर भी नकल कराए जाने की जरा सी भी आशंका प्रतीत होती है, तत्काल संबंधित केंद्र के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अब यदि किसी भी परीक्षा केंद्र का सीसीटीवी कैमरा बंद मिलेगा तो तत्काल केंद्र निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। 
- प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय। 

बुंदेलखंड के नकल माफियाओं के सियासी रसूक के आगे बीयू सरेंडर 

बुंदेलखंड के नकल माफियाओं के सियासी रसूक के आगे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन सरेंडर है। शासन के आदेश हवा में उड़ाए जाते हैं। नेताओं के फोन पर केंद्र बनते हैं। यदि सियासी रसूक रखने वाले कॉलेज के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो लीपापोती कर दी जाती है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना 30 से 40 कॉलेजों के कैमरे बंद रहे और बीयू खामोश बना रहा। 

परीक्षा केंद्र बनने वाले कॉलेज में सीसीटीवी कैमरा होना अनिवार्य है। केंद्र का निरीक्षण करने वाली समिति भी इसकी बाकायदा जांच की जाती है। मगर जब परीक्षा शुरू हो जाती है तो नकल माफिया कैमरा बंद कर देते हैं। बीयू ने परीक्षा भवन में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया है। 

बड़ा सवाल ये उठता है कि यदि ये कॉलेज कैमरे बंद कराकर नकल करा रहे थे तो इसकी रिपोर्ट कंट्रोल रूम से बीयू अधिकारियों को दी गई। यदि रिपोर्ट दी गई तो बीयू अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? सूत्रों ने बताया कि अब तक परीक्षा शुरू हुए दस दिन से ज्यादा समय बीत चुका है। इसके बावजूद परीक्षा के दौरान कैमरे बंद होने के बावजूद अब तक किसी कॉलेज के खिलाफ कोई कार्रवाई बीयू प्रशासन ने नहीं की है। 

अधिकारी भी सवालों के घेरे में, परीक्षा निरस्त करने में लग गए छह दिन 
जालौन के जिस हाजी अनीस कॉलेज खां कन्या इंटर कॉलेज में उड़ाका दल ने 31 मार्च की पहली पाली में सामूहिक नकल की रिपोर्ट दी थी, उसकी परीक्षा निरस्त करने में बीयू को छह दिन लग गए। वो भी तब जब पेपर लीक होने का मामला तूल पकड़ गया। ऐसे में अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। 

पहले भी तो लीक हुए पेपर, अब पुलिस करेगी पड़ताल 

जिस तरीके से श्रीराम महाविद्यालय के लिपिक राजदीप ने पेपर लीक किया उसे देखते हुए पुलिस को अंदेशा है कि भौतिक विज्ञान से पहले हुए दूसरे प्रश्न पत्र भी पेपर लीक हो सकते हैं। इसके पहले भी आरोपी बाबू चार परीक्षाओं में बंडल बनाने का काम कर चुका था। इन स्थितियों को देखते हुए पुलिस आरोपी बाबू समेत प्रबंधक एवं अन्य कर्मचारियों की सीडीआर खंगालने में जुटी है।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय की परीक्षाएं 28 मार्च से आरंभ हैं। अभी तक बीएससी सेकेंड इयर की चार परीक्षाएं हो चुकीं। इनमें गणित के सभी प्रश्नपत्र समेत भौतिक विज्ञान के प्रथम प्रश्न पत्र की परीक्षा हो चुकी। पुलिस अफसरों का कहना है कि आरोपी लिपिक के पेपर भेजने के महज सात मिनट के भीतर प्रश्न पत्र तमाम छात्रों के मोबाइल में पहुंच गया। इसे देखते हुए कहा जा रहा कि छात्रों को पेपर आने की बात पहले से मालूम थी। उनको यह बात भी पता थी कि पेपर सुबह छह बजे तक मिल जाएगा। चटपट तरीके से छात्र पेपर हल करके परीक्षा हाल तक पहुंच गए। 

इसको देखते हुए आशंका जताई जा रही कि भौतिक विज्ञान प्रथम समेत अन्य विषय के पेपर भी आउट हुए। अब इसकी पड़ताल के लिए पुलिस महाविद्यालय स्टॉफ कर्मचारियों के मोबाइल की पड़ताल के साथ इनकी सीडीआर भी खंगाल रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है बंडल खोलने में लिपिक की ड्यूटी सुनियोजित तरीके से लगती थी। महाविद्यालय में तीन लिपिक हैं। राजदीप को ही नियमित तौर से प्रश्नपत्र के बंडल खोलने में लगाया जाता था। आरोपी लिपिक की भतीजी भी बीएससी (द्वितीय वर्ष) की छात्रा है। उसके चार प्रश्नपत्र पहले हो चुके। 

इनमें 28 मार्च को गणित प्रथम (एलजेब्रा एंड मैट्रिक्स), 30 मार्च को गणित द्वितीय (इक्यूवेशन एंड इंटरनल ट्रांसफरर्मेशन), एक अप्रैल को गणित तृतीय (मैकेनिक्स) एवं चार अप्रैल को भौतिक विज्ञान का प्रथम प्रश्न पत्र (ऑपटिक्स एंड लेजर्स) का हो चुका। पुलिस सूत्रों का कहना है राजदीप की ड्यूटी इन परीक्षाओं के समय भी वहां थी। एसएसपी शिवहरी मीना का कहना है अभी इस मामले की जांच चल रही है। सभी पहलुओं की पड़ताल पुलिस कर रही है। 
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सात मिनट में 800 के मोबाइल पर पहुंच गया था फिजिक्स का पेपर

महज सात मिनट के भीतर 800 छात्र-छात्राओं के मोबाइल पर बीएससी द्वितीय वर्ष का फिजिक्स का द्वितीय प्रश्नपत्र पहुंच गया था। खास बात यह है कि जब पुलिस खुलासा करने में लगी तभी सभी ने अपने मोबाइल से डिलीट कर दिया। पुलिस की सर्विलांस टीम ने इसका खुलासा किया है। डॉटा रिकवरी करने की कोशिश की जा रही है। जब्त किए गए सभी 32 मोबाइल का रिकार्ड बारीकी के साथ चेक किया जा रहा है। 

बंगरा के श्रीराम महाविद्यालय के लिपिक राजदीप यादव द्वारा आउट किए गए पेपर की कॉपी बड़ी तेजी के साथ वायरल हुई। कुछ ही देर में यह पेपर बंगरा से झांसी तक आ गया। टहरौली में भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं तक पहुंच गया था। पूछताछ में शामिल पुलिस अफसरों के मुताबिक लिपिक जयप्रकाश की ड्यूटी महाविद्यालय में पेपर के बंडल बनाने में थी। बुधवार को सुबह 5.55 मिनट पर पेपर की सील खुली। इसके बाद सुबह 6.08 मिनट पर जयप्रकाश ने मोबाइल से फोटो खींच कर व्हाट्सएप के जरिए अपनी भतीजी को भेज दिया। उसकी भतीजी ने यह पेपर अपनी एक सहेली के अलावा अन्य चार छात्रों को भी भेज दिया। 

आखिरी में अजय भाष्कर के साथ ही दूसरे छात्र-छात्राओं तक 6.15 मिनट पर यह पेपर आ गया। उस समय तक इन लोगों ने अपने-अपने दोस्तों को भी पेपर की कापी फारवर्ड कर दी थी। जिनके पास पेपर थे, उन लोगों ने बाहर ही साल्व कर लिया था। यह छात्र चिट लेकर परीक्षा हाल में पहुंचे थे। पुलिस अफसरों का कहना है कि पूरे मामले की बारीकी के साथ पड़ताल की जा रही है। 
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