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बाइस गांवों को नगर निगम में शामिल होने के लिए अभी करना होगा इंतजार

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झांसी। नगर निगम सीमा में शामिल किए जाने को लेकर जो 22 गांव प्रस्तावित हैं, वहां हाल में पंचायत चुनाव करा दिए गए। अब यहां ग्राम पंचायत गठित हो गई। अब इन गांवों का निगम सीमा में शामिल होना कम से कम पांच साल के लिए टल गया। डी-नोटिफिकेशन नोटिस समय पर न भेजे जाने से यह सभी गांव पिछली बार निगम सीमा में शामिल होते-होते रह गए थे।
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इन गांवों को निगम सीमा में शामिल करने की संस्तुति नगर निगम सदन ने नवंबर 2019 में ही कर दी थी। लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते इसकी फाइल ही डंप कर दी गई। सदन से मंजूरी के करीब दो माह इसे मंडलायुक्त कार्यालय भेजा गया लेकिन नक्शे आदि न होने से वहां भी तीन माह तक फाइल पड़ी रही। फाइल जब आगे शासन को भेजी गई, उसी दौरान जनगणना की अधिसूचना जारी हो गई। मार्च माह में पंचायती राज विभाग से इन गांवों के लिए डी-नोटिफिकेशन मांगा गया। लेकिन उसने भी प्रक्रिया पूरी न होने का हवाला देते हुए नोटिफिकेशन नहीं भेजा। इसके समय पर न भेजे जाने से झांसी की सीमा विस्तार संबंधी पूरी प्रक्रिया उलझ गई। वहीं, प्रयागराज, लखनऊ जैसे तमाम शहरों की निगम सीमा विस्तारित कर दी गई। इसके बाद मार्च महीने में पंचायत चुनावों की अधिसूचना में इन प्रस्तावित गांवों में ग्राम पंचायत गठित करने के लिए भी अधिसूचना जारी कर दी गई। पंचायत चुनाव के बाद इन सभी गांवों में ग्राम पंचायतों का गठन कर दिया गया। इनके गठन के साथ ही इन गांवों के पांच साल तक निगम सीमा में शामिल होने संभावनाएं भी खत्म हो र्गईं। दरअसल, अंतिम बार वर्ष 2002 में नगर महापालिका से नगर निगम में तब्दील होने पर 18 गांव जोड़े गए थे। इनमें झांसी खास का शेष आंशिक भाग, गढ़िया गांव, तालपुरा, सिमरहा, सिर्गारा, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, मेरी, बूढ़ा, सिमरधा, करारी, नया गांव, लहरगिर्द, ढड़री, हंसारी, बिजौली, पिछोर, करगुवां तक नगर निगम की सीमा बढ़ गई।
ये गांव किए जाने थे शामिल
खैलार, डगरिया, रुंद, सिमरावारी, अठोंदना, पठारी, सिजवाहा, पाली पहाड़ी, अंबावाय, रुंदकरारी, परवई, भोजला, भरारी, टाकोरी, मुस्तरा, दिगारा, पलींदा, बलौरा, रुंदबलौरा, पाडरी, गोरामछिया, छपरा, डिमरौनी।
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प्रस्तावित गांवों का कुल क्षेत्रफल- 11520 हेक्टेयर
कुल जनसंख्या- 69,420
स्थानीय लोगों के हाथ आई मायूसी
नगर निगम सीमा में शामिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रस्तावित गांव के निवासियों में उत्साह जग गया था। उनको विकास कार्य शुरू होने की उम्मीद जग गई लेकिन, अफसरों की लापरवाही के चलते उनकी सारी उम्मीदें धूल में मिल गईं। निगम सीमा में शामिल न हो पाने की वजह से स्थानीय लोग मायूस भी हो उठे हैं।
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