जिले में चार दिन पहले 1300 एमटी यूरिया की रैक भले ही आ गई है, लेकिन अब भी 84 साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं पहुंच पाई है। इससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे प्राइवेट उर्वरक की दुकानों से महंगे दाम पर यूरिया खरीद कर धान की फसल में छिड़काव करने को विवश हैं।
जिले में आठ लाख 16 हजार किसान हैं। इन किसानों ने एक लाख 47 हजार 84 हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई की है। इस समय धान की फसल में यूरिया का छिड़काव होना जरूरी है। किसान यूरिया के लिए समितियों पर जा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कारण, जिले में कुुुल 208 साधन सहकारी समितियां हैं। जिसमें से 175 साधन सहकारी समितियां सक्रिय हैं। इनमें से 108 साधन समितियों पर यूरिया नहीं थी। चार दिन पहले जिले में 1300 एमटी यूरिया आई जरूर, लेकिन अभी तक महज 24 साधन सहकारी समितियों पर ही यूरिया पहुंच पाई है। अभी भी 84 साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं पहुंच पाई है। इससे इन समितियों से जुड़े किसानों को यूरिया के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे धान की फसल में यूरिया का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध में एआर कोआपरेटिव अमित कुमार पांडेय का कहना है कि समितियों पर यूरिया भेजने का कार्य किया जा रहा है। दो-तीन दिन के अंदर सभी समितियों पर यूरिया पहुंच जाएगी। जिन समितियों पर यूरिया नहीं पहुंच पाएगी, वहां के लिए यूरिया की दो रैक की मांग और की गई है। जो जल्द ही जिले में आ जाएगी। जिले में यूरिया की कमी नहीं होने दी जाएगी।