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कोच को तरसे मैदान, प्रशिक्षण के अभाव में बिखर रहे अरमान

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हरदोई। शासन के खिलाड़ियों को तराशने के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। कहीं मैदान हैं तो प्रशिक्षक नहीं तो कहीं प्रशिक्षक हैं, मैदान नहीं हैं। परिषदीय विद्यालयों में खेल शिक्षकों के साथ-साथ खेल के लिए बजट का भी अभाव है।
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सीतापुर रोड स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम ने अब तक कई खिलाड़ियों को एक मुकाम दिया है लेकिन पिछले ढाई सालों से यहां कई खेलों के कोचों का अभाव है। जिला क्रीडाधिकारी रंजीत यादव ताइक्वांडों के खिलाड़ी हैं, इसलिए इन दिनों वह सिर्फ 11 ताइक्वांडों खिलाड़ी प्रशिक्षण पा रहे हैं। वेटलिफ्टिंग, पावर लिफ्टिंग, जूडो, हॉकी, फुटबाल, वालीबॉल आदि खेलों के लिए आज भी कोच नहीं हैं। जिला क्रीडाधिकारी का कहना है कि अगले माह कोच मिलने की उम्मीद है।
इसी तरह युवा कल्याण विभाग को भी ग्राम पंचायतों में खेल मैदान विकसित कर मंगल दलों द्वारा ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने के निर्देश हैं लेकिन ग्राम पंचायतों में कहीं मैदानों पर कब्जा है तो कहीं मनरेगा से मैदानों को सही नहीं किया जा सका है।
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इधर परिषदीय विद्यालयों में खेलों के लिए प्रत्येक ब्लाक में एक खेल शिक्षक का पद स्वीकृत है लेकिन अब सिर्फ सात ही रह गए हैं। जबकि खेल अनदेशक के पद पर जिले में 357 पदों पर नियुक्ति हैं, जिनके द्वारा खेल कराए जाते हैं। पांच लाख बच्चों के सापेक्ष 357 खेल शिक्षक सीमित संसाधनों में किस तरह से खेल करा रहे होंगे। अंदाजा लगाया जा सकता है। माध्यमिक विद्यालयों की बात करें तो जिले के 54 राजकीय इंटर कालेजों में चार में खेल शिक्षक हैं एवं 72 एडेड स्कूलों में 15 में खेल शिक्षक हैं।
स्पोर्टस स्टेडियम में: 29 अगस्त को करीब 21 हजार, 2 अक्तूबर, 15 अगस्त व 26 जनवरी को करीब पांच पांच हजार रुपए।
युवा कल्याण विभाग: 5 लाख सालाना, 19 ब्लाक व एक जिला स्तरीय खेलकूद के लिए।
परिषदीय विद्यालय: 5 हजार प्रत्येक प्राथमिक स्कूल, 10 हजार जूनियर स्कूल में वर्ष में एक बार। एक लाख रुपए खेल कूद के लिए पूरे जिले में सालाना।
माध्यमिक स्कूल: माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 में फीस में क्रीड़ाशुल्क जो लिया जाता है उसी के अनुसार खेलकूद कराया जाता है। जो काफी कम है।
हरदोई। सीतापुर रोड स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम में इस समय एक भी कोच नहीं है। क्रीड़ाधिकारी रंजीत यादव 11 खिलाडिय़ों को ताइक्वांडों का प्रशिक्षण देते हैं। निदेशालय से अगले माह जिले को कोच मिलने की उम्मीद है। कहने का तात्पर्य यह है कि बिना कोच के स्टेडियम फिलहाल बेमतलब ही साबित हो रहा है। हाकी, फुटबाल, वेटलिफ्टिंग, पावर लिफ्टिंग के लिए खिलाडिय़ों को अन्य जगह ही प्रशिक्षण लेने की विवशता है।
हरदोई। युवा कल्याण विभाग की देखरेख में वर्ष 2005 में जिले में चार मिनी स्टेडियम करीमनरगर पिहानी, कुठिला सरैया टोडरपुर, पुरवायां मेहंदीखेड़ा मल्लावां व तेरवा गौसगंज कछौना में 20-20 लाख रुपये की लागत से बनवाए गए थे लेकिन 16 सालों में आज तक वहां प्रशिक्षक नहीं मिल सका। जिला युवा कल्याण अधिकारी पीके मिश्रा ने बताया कि इनके जीर्णोद्धार के लिए इस्टीमेट बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
हरदोई। टड़ियावां ब्लाक में युवा कल्याण विभाग के एक मिनी स्टेडियम को शासन से हरी झंडी मिल गई है। करीब चार करोड़ लागत से यहां स्टेडियम तैयार होगा। शासन स्तर से दो करोड़ 50 लाख की राशि भी आवंटित कर दी गई है। जिला युवा कल्याण अधिकारी ने बताया कि शाहाबाद के ककरघटा में भी मिनी स्टेडियम मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद तैयार करवाया जा रहा है।
हरदोई। अंतरराष्ट्रीय कोच पूनम तिवारी का कहना है कि ओलंपिक हो या फिर अन्य कोई प्रतिस्पर्धा। पूरा देश खिलाड़ियों से उम्मीद करने लगता है पर उसको तैयारियों के लिए क्या संसाधन मिलते हैं, इसे देखने वाला कोई नहीं है। खेल संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए।
हरदोई। वेट लिफ्टिंग के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रंजीत रस्तोगी का कहना है कि सुविधाएं मिले तो जिले के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल दिला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिले के खिलाड़ियों ने वो दिन भी देखे हैं। जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चयन के बाद जाने के लिए पैसे नहीं होते थे। चंदा करना पड़ता था। कई खिलाड़ियों ने लगाव होने पर भी खेल से नाता तोड़ लिया।
हरदोई। 10-स्क्वायर फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस एक मौका चाहिए। वे भी राज्य व नेशनल स्तर पर कई प्रतियोगिताएं करा चुके हैं। जिसमें जिले के खिलाड़ी नाम कमा चुके हैं। सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत है।
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- युवा कल्याण विभाग के मिनी स्टेडियमों को मिल सकते प्रशिक्षक
- स्पोर्ट्स स्टेडियम को अगले माह मिलेंगे कोच।
- मनरेगा व ग्राम पंचायतों के सहयोग से ग्राम पंचायतों में विकसित होंगे खेल मैदान।
- योजना बनने के बाद परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों में भी खेलों को बढ़ावा देने की बनेगी योजना।
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