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चूल्हा फूंकने की जद्दोजहद खोल रही भोजन वितरण की पोल

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फोटो-46- ग्राम शेरुपुरवा में मकान के अंदर पानी भरने के कारण छत पर खाना बनातीं राजरानी। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरपालपुर। रोशनी का पर्व दीवाली बेहद करीब है, लेकिन बाढ़ ने कटरी के लोगों की जिन्दगी में अंधेरा कर दिया है। पानी गांव और घरों में घुसा तो लोग सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन भले ही हर बाढ़ पीड़ित तक लंच पैकेट और खाद्य सामग्री पहुंचाने का दावा कर रहा हो, लेकिन मकान की छतों से लेकर सड़क किनारे तक पर चूल्हा फूंकने की मशक्कत में लगी महिलाएं इन दावों की हकीकत बयां करती हैं।
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सवायजपुर तहसील क्षेत्र का बड़ा इलाका गंगा, रामगंगा, गर्रा, गंभीरी, नीलम आदि नदियों के किनारे बसा है। पहाड़ी इलाकों में बारिश होने और बांधों से पानी छोड़े जाने पर इन नदियों का जलस्तर बढ़ता है तो सवायजपुर के कटरी इलाके में सैलाब आ जाता है। पिछले कई दिनों तक जलस्तर बढ़ने के बाद नदियों का पानी अब घटने लगा है, लेकिन दुश्वारियां हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं। अरवल थाना क्षेत्र के ग्राम लुक्कापुरवा में अधिकांश घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। अधिकांश मकान कच्चे हैं और छत तक पहुंचने की गुंजाइश भी नहीं है।
ऐसे में लुक्कापुरवा में पानी के बीच ही फूस जलाकर चूल्हा जलाने की मशक्कत करती मिली पलक ने बताया कि बुधवार को लंच पैकेट मिले थे, लेकिन गुरुवार को कोई खाना देने नहीं आया। भूखा रहा नहीं जा सकता, लिहाजा मशक्कत कर चूल्हा जलाने की कोशिश की जा रही है। कुछ इसी तरह के हालात कटरी के गांव शेरुपुरवा में भी हैं। शेरुपुरवा में मकानों में पानी भर गया। जिनके पक्के मकान थे उन्होंने अपनी छत पर गृहस्थी पहुंचा दी। शेरुपुरवा में मकान की छत पर खाना बनाने की कवायद में चूल्हा फूंकती मिलीं राजरानी ने भी दुश्वारियां बताईं। बताया कि पानी कम होने के बाद भी राहत तब मिलेगी जब गांव में भरा पानी निकल जाए या फिर सूख जाए। लंच पैकेट वितरित न किए जाने की जानकारी उन्होंने भी दी। अदनिया में बाढ़ का पानी सबसे पहले पहुंच गया था। नदी का पानी कम होने लगा है, लेकिन गांव की स्थिति में कोई अंतर नहीं आया। छोटेलाल के घर में पानी घुस गया और अभी तक निकल नहीं पाया।
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बाढ़ का घटता पानी भी मुसीबत का सबब है। घटते पानी के साथ जमीन और ज्यादा तेजी से कट रही है। करनपुर में तो बाढ़ के पानी ने चढ़ते और उतरते खूब नुकसान किया। यहां बिजली का पोल तारों सहित टूटकर गिर गया। गनीमत यह रही कि यहां की विद्युत आपूर्ति पहले से ही एहतियात के तौर पर बंद करा दी गई थी नहीं तो पानी में करंट से बड़ा हादसा हो सकता था।
सवायजपुर के नायब तहसीलदार सुशील कुमार से बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट न मिलने पर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि खाना कई प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच पा रहा था। इसके कारण अव्यवस्था भी हो रही थी। अब ग्राम प्रधान और कोटेदारों को स्थानीय स्तर पर बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। यही वजह है कि अब लंच पैकेट प्रशासनिक स्तर से नहीं बांटे जा रहे।
दहेलिया से पतावरपुरवा जाने वाली सड़क पर अरवल पश्चिम और अदनिया गांव के 20 परिवार मवेशियों के साथ डेरा जमाए हुए हैं। वैसे तो ज्यादातर बाढ़ पीड़ित मकान और गृहस्थी के साथ मवेशी छोड़ने को तैयार नहीं है, लेकिन जिन मकानों में बाढ़ का पानी ज्यादा भर गया है उनके पास कोई और विकल्प भी नहीं है। अदनिया और अरवल पश्चिम के मूलचंद, मोरध्वज, धनीराम, रामसेवक, नन्हेंभइया, रामकिशोर, रामसागर, राजपाल, सुशील, हरिश्चंद्र, वीरपाल, राजीव, गिरीश, ईश्वरदयाल आदि अपने परिवार और मवेशियों के साथ सड़क पर ही डेरा डाले हैं।

फोटो-48- अदनिया में घर में भरा पानी दिखाते छोटेलाल। संवाद- फोटो : HARDOI

फोटो-49- सड़क किनारे डेरा डाले अदनिया निवासी प्रेमवती और किरन। संवाद- फोटो : HARDOI

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