हमीरपुर। ओलंपिक खेलों में पदक जीतकर लौटे खिलाड़ियों का स्वागत, सम्मान देखकर युवाओं में खेल के प्रति उत्साह बढ़ा है। शासन-प्रशासन भी अब खेलों को लेकर गंभीर हैं। जिसकी नजीर जनपद में देखने को मिल रही है। डीएम के निर्देश पर जनपद में 330 खेल मैदानों को बनाने की तैयारी तेज हो गई है। खेल मैदानों को आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण किया जा रहा है। बीते दिनों प्रदेश व केंद्र सरकार और अन्य संस्थाओं ने जिस तरह खिलाड़ियों पर इनामों की बारिश की है। उससे देश भर में खेल का माहौल बना है।
देखा जाए तो जनपद में तमाम ऐसे युवा खिलाड़ी हैं। जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया और स्थान पाकर जनपद व खुद का नाम रोशन किया। लेकिन तमाम खिलाड़ियों को उचित मार्गदर्शन, कोंच व सुविधाएं न मिलने के कारण अपने मुकाम तक नहीं पहुंच सके। युवा खिलाड़ियों का कहना है जनपद के एक मात्र राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में सभी खेलों की सुविधाएं तो हैं। लेकिन सही कोच न होने के कारण उन्हें सही प्रशिक्षण नहीं मिल पाता है। जिससे वह अपनी मेहनत को असली रंग नहीं दे पाते है और युवा प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। इसको लेकर युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की।
शहर के मेरापुर निवासी धावक रंजना खंगार ने बताया सुविधाओं के अभाव पर भी कभी हिम्मत नहीं हारी। अगर अच्छी कोचिंग व सुविधाएं मिलती तो वह देश के लिए पदक जीत सकती थीं। बताया वर्ष 2007 से लेकर 2016 तक 20 विभिन्न राज्यों में आयोजित फुल व हॉफ मैराथन में प्रतिभाग किया। जिनमें चार बार द्वितीय व दस बार तृतीय स्थान प्राप्त किया है।
फुटबॉल खिलाड़ी हर्षित धुरिया का कहना है वह मंडल से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी टीमों के साथ प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अच्छा प्रदर्शन किया है। कोरोना संक्रमण के बाद लॉकडाउन के कारण फुटबॉल मैच न होने के कारण प्रतिभा का प्रदर्शन का मौका नहीं मिला। कहा युवा खिलाड़ियों को उचित मार्गदर्शन मिले तो नाम रोशन कर सकते हैं।
नगर निवासी एथलेटिक्स खिलाड़ी सती कुशवाहा का कहना है कि कोच व सुविधाओं के अभाव में उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिलता है। खुद से और कुछ सीनियर खिलाड़ियों के बताए गए टिप्स को मानकर अपने खेल को बेहतर करने में लगीं हैं। अगर उन्हें सही सुविधाएं व कोच मिले तो वह भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाकर नाम रोशन कर सकती हैं।
नगर निवासी खो-खो खिलाड़ी इच्छा वर्मा ने बताया कोरोना संक्रमण के बाद से उनका अभ्यास सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच भी नहीं है। सुविधाओं के अभाव में मनोबल टूट जाता है। थक हारकर बैठने के सिवा कोई रास्ता नहीं है। अगर सरकार उन्हें सुविधाएं व कोच दे तो वह भी ऊंचा मुकाम हासिल कर नाम रोशन कर सकती हैं।