हमीरपुर। जनपद में कुष्ठ रोगियों की संख्या घटी है। यह बात आंकड़ों से साफ होती है। मौजूदा समय में महज 15 कुष्ठ रोगी उपचाराधीन हैं। कुष्ठ की वजह से विकलांगता के शिकार होने वाले 60 से अधिक रोगियों का पेंशन मिल रही हैं।
कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ.पीके सिंह ने बताया कि कुष्ठ के सर्वाधिक 89 रोगी वर्ष 2015-16 में चिह्नित किए गए थे। 2016-17 में इसमें गिरावट आई और नए रोगियों की संख्या 51 हो गई। वर्ष 2017-18 में इसमें और गिरावट दर्ज की गई और 43 नए रोगी चिह्नित किए गए। वर्ष 2018-19 में भी 43 ही रोगी अभियान में खोजे गए।
वर्ष 2020-21 में 18 और मौजूदा वित्तीय वर्ष के सात माह के अंदर 13 नए रोगियों को खोजा गया है। वर्तमान समय में 15 रोगियों का उपचार चल रहा है। इन मरीजों में कुछ छह माह और कुछ एक साल के उपचार के बाद कुष्ठ से पूरी तरह से उबर जाएंगे।
सवा सौ गांवों में विशेष अभियान
कुष्ठ रोग विभाग के हेल्थ एजूकेटर आरके सोनकर ने बताया कि जनपद के सवा सौ गांवों में कुष्ठ रोगी खोजने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इनमें कुरारा ब्लाक में 19, मौदहा में 25, सुमेरपुर में 35, मुस्करा में 13, सरीला में आठ, गोहांड में नौ, नौरंगा (राठ) में सात और राठ (अर्बन) में नौ गांवों को चिह्नित किया गया है। इन गांवों में कुल 352 टीमें लगाई गईं हैं।
कुष्ठ रोगियों को मिल रहा योजनाओं का लाभ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एके रावत ने बताया कि कुष्ठ रोग की रोकथाम को लेकर साल में दो बार अभियान चलाए जाते हैं। अक्तूबर में सघन कुष्ठ रोगी खोजी एवं नियमित निगरानी कार्यक्रम और दूसरा 30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान।