बोरिंग करने के नाम पर समाज कल्याण विभाग में लाखों का घोटाला सामने आया है। लोकायुक्त के आदेश पर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने मामले की जांच शुरू करा दी है। एडीएम (फाइनेंस) विधान जायसवाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी घोटाले की जांच कर रही है। कमेटी ने फिलहाल शिकायतकर्ता के साथ ही विभाग से भी साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा है। इसके बाद मौके पर जाकर संबंधित लाभार्थियों के अलावा खेतों में बोरिंग की भी तस्दीक की जाएगी। लोकायुक्त ने मामले की जांच जल्द पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है।
सर्वाधिक गड़बड़ी 2010 से 2015 के बीच की गई। इन पांच सालों में इस योजना में लाखों रुपये का गोलमाल हो गया। शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत कई बार समाज कल्याण विभाग से मामले से संबंधित कुछ सूचनाएं भी मांगीं मगर लंबे समय तक विभाग इसके लिए उन्हें दौड़ाता रहा।
अनुसूचित जाति के किसानों के खेतों में बोरिंग नहीं कराने और उसका भुगतान करा लेने की लोकायुक्त से शिकायत हुई थी। लोकायुक्त के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। शिकायतकर्ता और समाज कल्याण आदि विभाग के लोगों के पक्ष लिए जा रहे हैं। इसके बाद मौके पर जाकर जांच की जाएगी। मामला थोड़ा पेचीदा है इसलिए जांच पूरी होने में समय लगेगा। - विधान जायसवाल, एडीएम फाइनेंस