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खनकने लगा चूड़ी कारोबार

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रफ़रोजाबाद ! चूड़ी के गोदाम में काम करते कारीगर - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। मंदी की मार झेल रहे कांच चूड़ी कारोबार में श्रावण मास में तेजी आई है। आगामी दिनों में रक्षाबंधन, करवाचौथ और दीपावली जैसे त्योहारों के मद्देनजर अन्य शहरों के व्यापारी सुहागनगरी आने लगे हैं। इससे चूड़ी कारोबारी उत्साहित हैं। कारखानों में सादा चूड़ी और गोदामों में फैंसी चूड़ी तैयार कराने का काम तेज है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में चूड़ी कारोबार में 2000 से 3000 करोड़ रुपये तक उछाल आने की उम्मीद है।
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कोरोना, मंदी और जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल से हलकान सुहागनगरी का परंपरागत चूड़ी कारोबार अब सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है। श्रावण मास में चूड़ी की डिमांड बढ़ने और आगामी दिनों में रक्षाबंधन, दीपावली, करवाचौथ और अहोई अष्टमी जैसे त्योहारों व सामाजिक कार्यक्रमों में चूड़ी की भरपूर मांग है। चूड़ी की मांग बढ़ने एवं व्यापारिक गतिविधियां सामान्य होने के साथ ही अन्य प्रांतों व जिलों के चूड़ी व्यापारी सुहागनगरी में दस्तक देने लगे हैं। बाहरी व्यापारियों की दस्तक के साथ ही चूडी गोदामों में भी फैंसी व कलात्मक चूड़ी तैयार कराने का काम भी तेज हो गया है।
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स्थिति सामान्य होते ही चूड़ी श्रमिकों में उत्साह
जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल से उबर चुके चूड़ी कारखानों में भी सादा चूड़ी का उत्पादन बढ़ाने का दबाव है। 70 से अधिक कारखानों में चूड़ी उत्पादन का पहिया फर्राटा भर रहा है तो शहर के गली-मोहल्ला में संचालित पांच हजार से अधिक गोदामों में कार्यरत 1.5 लाख चूड़ी कारीगर, पल्लेदार, जुड़ाई, पकाई श्रमिकों के अलावा 500 से अधिक ट्रांसपोर्ट कंपनी संचालकों में उत्साह है।
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चूड़ी कारोबारी बोले, मांग बढ़ेगी तो आएगी तेजी
चूड़ी कारोबार में तेजी तो आई है। हालांकि अपेक्षा अनुरूप चूड़ी की डिमांड नहीं मिल रही है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में अन्य जगहों से चूड़ी के ऑर्डर मिलेंगे। त्योहार के मद्देनजर माल तैयार कराने की जल्दी है।
सन्नी शर्मा चूड़ी गोदाम संचालक
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मानसून के कारण कई प्रांतों में बाढ़ की स्थिति है। आवागमन प्रभावित है। इस मौसम में मेला-तमाशों जैसे आयोजन भी ठप हैं। इसका असर चूड़ी कारोबार पर है। हालांकि उम्मीद है कि स्थिति सामान्य होते ही चूड़ी कारोबार में तेजी आएगी।
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पीके झिंदल चूड़ी कारखानेदार
एक नजर सुहागनगरीं के चूड़ी कारोबार पर
- 70 से अधिक चूड़ी कारखानों में 4320 सादा चूड़ी तोड़े का होता उत्पादन
- 5000 से अधिक गोदामों में लगभग 1.5 लाख से अधिक लोगों को मिलता है रोजगार
- अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन लगभग 100 करोड़ से अधिक फैंसी व कलात्मक चूड़ी का होता कारोबार
- महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु, केरल के साथ पूर्वी व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा एमपी व झारखंड में होती है चूड़ी की बड़ी खपत
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