फतेहपुर। जन्माष्टमी सोमवार को बड़ी ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी की तैयारियां शनिवार को घरों और मंदिरों में होती दिखी। पुलिस लाइन में त्योहार की तैयारियां जोरों पर थीं।
आचार्य पंडित दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष ज्योतिषी संयोग बना था, ऐसा संयोग इस बार भी बना रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय भाद्रपद कृष्णपक्ष की आधी रात्रि अष्टमी तिथि थी, रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर कर रहा था।
कुछ इसी तरह का संयोग इस बार भी जन्माष्टमी तिथि पर हो रहा है। ज्योतिष के जानकारों का मनाना है कि सोमवार को पड़ने वाली जन्माष्टमी का संयोग वैसा ही रहेगा जैसा द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर हुआ था। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार की सुबह ही लग जाएगी, जोकि रात के दो बजे के बाद समाप्त होगी। जयंती योग और रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है। इसके अलावा अष्टमी तिथि पर चंद्रमा वृषभ राशि में मौजूद रहेंगे।
जन्माष्टमी तिथि और पूजा
आचार्य पंडित दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का त्योहार सोमवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रविवार रात 11:25 बजे से शुरू हो जाएगी, जो सोमवार रात दो बजे तक रहेगी। ऐसे में सोमवार को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र सोमवार सुबह 06:39 बजे पर रहेगा। ऐसे में जन्माष्टमी के पूजन का शुभ मुहूर्त रात 11:59 बजे से रात 12:44 बजे तक रहेगा।
जन्माष्टमी पूजन विधि
जन्माष्टमी के दिन प्रात: जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके व्रत का संकल्प लें। माता देवकी और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र पालने में स्थापित करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा आदि देवताओं के नाम जपें। रात्रि में 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं। पंचामृत से अभिषेक कराकर भगवान को नए वस्त्र अर्पित करें एवं लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं। पंचामृत में तुलसी डालकर माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग लगाएं, तत्पश्चात आरती करके प्रसाद को भक्तजनों में वितरित करें।