फर्रुखाबाद। विशेष ट्रेन से इंसास रायफलें व मैगजीन फेंकने में लोवर कोर्ट से सजा पाए दोनों सीआरपीएफ के दोनों जवानों को एंटी डकैती न्यायाधीश ने दोष मुक्त कर दिया है। कोई ने ये फैसला अभियोजन पक्ष की कमजोर दलीलों के चलते सुनाया। नौ वर्ष पहले असम और मेघालय प्रदेश निवासी जवानों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।
गुजरात के गांधीनगर रेलवे स्टेशन से 23 दिसंबर 2012 को विशेष ट्रेन सीआरपीएफ के जवानों की कई कंपनियों को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हुई थी। फर्रुखाबाद से कानपुर के बीच ट्रेन की बोगी से कई इंसास रायफलें व मैगजीन फेंक दी गईं थीं।
25 दिसंबर 2012 को ट्रेन कानुपर के अनवरगंज स्टेशन पर पहुंची। वहां सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर ललित कुमार ने अधिकारियों को कई जवानों की रायफलें व मैगजीन गायब होने की जानकारी दी। लखनऊ के जीआरपी थाने में अज्ञात के खिलाफ रायफलें व मैगजीन गायब करने का मुकदमा दर्ज कराया गया।
निल पर दर्ज मुकदमे की जांच फर्रुखाबाद जीआरपी थाने को भेज दी गई। जांच में असम के जिला सुनीतपुर थाना तेजपुर के गांव पीठा कुआं निवासी सूर्या कुमार ( जनपद लखीमपुर खीरी में सीआरपीएफ में भर्ती) व मेघालय जिला वेस्ट गारो थाना डल्लू गांव सलपरीपरा निवासी रत्नाकर हंगोज के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
दोनों जवानों को लोअर कोर्ट में सजा सुनाई गई थी। दोषी करार दिए गए जवानों की ओर से 31अक्तूबर 2018 को एंटी डकैती न्यायालय में अपील दायर की गई। शनिवार को मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की कमजोर दलीलों के चलते दोनों जवानों को दोषमुक्त कर दिया।