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पदक विजेता बॉक्सर पर खेती करने का दबाव

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करन कुशवाहा। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। चार स्वर्ण समेत नौ पदक जीत चुका उभरता बॉक्सर स्टेडियम में कोच न होने से अभ्यास नहीं कर पा रहा है। खाली होने के कारण परिवार के लोग उस पर खेती बाड़ी करने का दबाव डाल रहे हैं। कोरोना में मेरठ का हास्टल बंद होने के कारण उसे घर लौटना पड़ा था।
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राजेपुर ब्लाक के भरह गांव निवासी करन कुशवाहा पुत्र ईश्वर दयाल ने वर्ष 2013 में फतेहगढ़ ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम में बॉक्सिंग का प्रशिक्षण शुरू किया था। इसके बाद मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम के छात्रावास में दाखिला ले लिया। बॉक्सिंग में वह चार स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य पदक जीत चुका है।
कोरोना संक्रमण के कारण वर्ष 2020 में हास्टल बंद होने पर करन घर आ गया। फतेहगढ़ स्टेडियम में बॉक्सिंग का कोच न होने के कारण प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। करन ने बताया कि परिवार के लोग खेती में पिता का हाथ बटाने का सुझाव दे रहे हैं। अगर स्टेडियम में अभ्यास की सुविधा नहीं मिली तो बॉक्सिंग छोड़नी पड़ेगी। करन बीए में पढ़ाई कर रहा है।
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करन ने बताया कि वर्ष 2019 में राज्य स्तरीय जूनियर बॉक्सिंग में स्वर्ण के साथ बेस्ट बॉक्सिंग का खिताब जीता था। इसी वर्ष यूथ स्तर की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत और साल के अंत में नेशनल खेलने गुहाटी गया। वहां कोई मेडल नहीं मिला था। राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के साथ करन का अभ्यास करने का मौका भी मिल चुका है।
डेढ़ वर्ष से नहीं है कोच
फतेहगढ़ स्थित ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम में मार्च 2020 से बॉक्सिंग कोच की तैनात नहीं हुई है। स्टेडियम में बॉक्सिंग के सात खिलाड़ियों पंजीकृत हैं। कोच न होने से खिलाड़ी कभी कभार ही स्टेडियम आते हैं। वर्ष 2017-18 व 2018-19 में 15 से 20 खिलाड़ी स्टेडियम में बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लेते थे।
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