किसानों ने पैसा देकर विद्युत विभाग के स्टोर से सामग्री ले ली और अब छूट योजना का लाभ देने के लिए सूची में भी नाम आ गया है। किसान नलकूप भी चालू कर चुके हैं। 11 किसानों को लाभ देने के लिए सूची एमडी कार्यालय से स्टोर पहुंची है। यह किसान कई माह तक योजना के तहत सामग्री लेने के लिए भटकते रहे थे।
वर्ष 2019 में निजी नलकूप के कनेक्शन देने के लिए छूट योजना शुरू हुई थी। इसके तहत नलकूप कनेक्शन में लगने वाले तार, पोल, ट्रांसफार्मर व अन्य सामग्री का एस्टीमेट बनने के बाद उससे ट्रांसफार्मर के 65 हजार रुपये घटा दिए जाते थे। इस तरह ट्रांसफार्मर मुफ्त में मिलता था। यह योजना नवंबर 2019 में बंद हो गई।
तब तक 411 कनेक्शन हुए थे। इसमें से 280 किसानों को स्टोर से पांच सितंबर 2019 तक सामग्री दी गई। बकाया 131 किसानों को सामग्री देने पर रोक लगा दी गई। इससे किसानों को धन जमा करने के बाद भी सामग्री न मिलने से विद्युत लाइन नहीं बन सकी।
इससे उनके नलकूप चालू नहीं हो सके। किसान अफसरों के पास भटकते रहे। योजना दोबारा शुरू नहीं हुई तो अगस्त 2020 में किसान फुल योजना (पूरा धन जमा कर) के तहत स्टोर से पत्रावली वापस खंड कार्यालय में भिजवाने लगे। 100 फाइलें स्टोर से खंड कार्यालय वापस भेज दी गईं।
30 किसानों ने एस्टीमेट रिवाइज कराकर ट्रांसफार्मर का धन जमा कर स्टोर से सामग्री लेकर नलकूप चालू करा लिए। एक साल बाद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम आगरा स्थित एमडी कार्यालय से वर्ष 2019 की कनेक्शन की फाइलों में से 11 किसानों की सूची स्टोर में भेजी गई।
इसमें छूट योजना के तहत सामग्री देने का आदेश दिया गया है। इस सूची में शामिल एक किसान ट्रांसफार्मर का धन जमा कर सामग्री का उठा चुका है और दूसरा जिला योजना का लाभ लेकर सामग्री प्राप्त कर चुका है।
चंद्रशेखर, नईम अली खां, अजय पाल, नक्षत्रपाल, महेंद्र सिंह, देव सिंह, बलवीर सिंह, प्रदीप कुमार, सुुघर सिंह, रामभेजी, महिमाचंद्र।
किसान चंद्रशेेखर ने स्टोर से सामग्री न मिलने पर जिला योजना की छूट योजना का लाभ लेकर सामग्री प्राप्त की और नलकूप चालू कर लिया। किसान रामभेजी ने पूर्ण जमा योजना के तहत ट्रांसफार्मर का धन जमा कर सामग्री प्राप्त की और नलकूप चालू कर लिया।
‘सूची एमडी कार्यालय से आई है। इसमें जब चेक किया तो दो लोग दूसरी योजनाओं के तहत सामग्री ले जा चुके थे। बकाया लोगों की फाइलें खंड कार्यालय से मांगी गईं हैं।’
विमल सागर, स्टोर प्रभारी
‘सूची एमडी कार्यालय से स्टोर में आई होगी। इस संदर्भ में जानकारी नहीं है। लंबित पत्रावलियों की सूची मांगी गई थी। उसे भेज दिया था।’
हरिवरण, अधिशासी अभियंता ग्रामीण