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घटयात्रा से शुरू पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव

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घटयात्रा में शामिल महिलाएं - फोटो : ETAWAH
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इटावा। विराग सागर महाराज एवं आचार्य प्रमुख सागर महाराज के सानिध्य में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव की शुरूआत बुधवार को घटयात्रा के साथ हुई। अयोध्या नगरी के रूप में तैयार हुए रामलीला मैदान पर यह घटयात्रा लालपुरा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से गाजे बाजे के साथ आई। सुबह छह बजे देव आज्ञा व गुरु आज्ञा से कार्यक्रम शुरू हुआ।
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लालपुरा जैन धर्मशाला से 1008 महिलाएं सिर पर कलश रखकर निकलीं। जबकि 11 रथों पर इंद्र, कुबेर इंद्र, यज्ञ नायक, भगवान के माता-पिता समेत अन्य इंद्रगण विराजमान होकर चल रहे थे। यात्रा का नेतृत्व मुनि विहसंत सागर ने किया। अयोध्या पहुंचकर यात्रा के कलशों से भूमि शुद्धि आचार्यों ने कराई। सुबह नौ बजे ध्वजारोहण विनोद जैन, शोभा जैन ने किया। दीप प्रज्वलन सुदर्शन जैन ने परिवार सहित किया। दोपहर 12 बजे सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, नांदी विधान, मंडल प्रतिष्ठा, मंगल कलश स्थापना, श्री जी अभिषेक व नित्यार्चना संगीतमय हुई।
मुनि श्री विहसंत सागर ने बताया पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन गर्भकल्याणक पूर्व रूप किया गया। इसमे सरस्वती वंदना, इंद्र सभा का आयोजन हुआ। कुबेर द्वारा अयोध्या नगरी की रचना करते हुए रत्न वृष्टि हुई तो तीर्थकर माता की अष्टकुमारी एवं छप्पन कुमारियों ने सेवा की। तीर्थकर माता ने सोलह स्वप्न देखे, जिसका मंचन बाहर से आएं कलाकारों द्वारा किया गया।
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पंचकल्याणक में बुधवार की सुबह जिनाभिषेक, नित्यार्चना, गर्भ कल्याणक पूजन व शांति हवन होगा। सुबह आठ बजे प्रवचन सभा, दोपहर 12 बजे यागमंडल विधान, दोपहर साढ़े तीन बजे सीमंतनी क्रियाएं ( माता की गोद भराई, महिला संगीत), शाम चार बजे आचार्य श्री संघ की दिव्य देशना, रात आठ बजे गर्भकल्याणक उत्तर रूप, महाराज नाभिराय का दरबार, महाराज द्वारा स्वप्नों का फलादेश, छप्पन कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण, गर्भ कल्याणक की आंतरितक क्रियाएं होंगी।
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