उदी। दो दिन की राहत के बाद एक बार फिर से चंबल का जलस्तर बढ़ने से आफत बढ़ने लगी है। शुक्रवार को कोटा बैराज से छोड़ा गया एक लाख क्यूसेक पानी इटावा पहुंचते ही चंबल का जल स्तर बढ़ने लगा है। 24 घंटे में पानी एक मीटर बढ़ चुका है। ऐसे में चंबल के बाद यमुना के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फिर से आफत आ सकती है।
केंद्रीय जल आयोग उदी चंबल स्थल प्रभारी शहजादे खां ने बताया कि शनिवार दोपहर चंबल का जलस्तर 126.5 से बढ़कर 126.90 हो चुका था। 6 अगस्त को चंबल का जलस्तर सर्वाधिक 128.51 तक पहुंच गया था। यह खतरे के निशान से 8 मीटर ऊपर था। इसके बाद जलस्तर घटना शुरू हुआ। दो दिन में दो मीटर घटना के बाद रविवार को फिर बढ़ने लगा।
यमुना का जलस्तर भी बढ़ा
बकेवर। रविवार को जलस्तर 6 घंटे तक थमने के बाद फिर बढ़ना शुरू हुआ। यमुना का जलस्तर रविवार सुबह 8 बजे से गिरना बंद हुआ। दोपहर 2 बजे से फिर से बढ़ने लगा।
चंबल नदी में छोड़े गए पानी से चंबल का पानी यमुना में आने लगता है। जिससे यमुना में बाढ़ से गांव जलमग्न हो जाते हैं। इस समय कई गांव टापू बन गए हैं। प्रशासन के अनुसार चकरनगर तहसील के दोनों किनारों के 30 गांव प्रभावित है। जिनमें से उत्तरी किनारे के बकेवर लवेदी थाना क्षेत्र के दस गांव प्रभावित हुए है।
केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी प्रेम कमल ने बताया कि यमुना का जलस्तर रविवार सुबह 8 बजे 121.72 पर आकर थम गया। उसके बाद दोपहर करीब 1 बजे तक 5 घंटे तक जलस्तर थमा रहा। दोपहर दो बजे से यमुना का जल स्तर दोबारा ुबढ़ने लगा है। शाम सात बजे तक जलस्तर 121.79 मीटर पर पहुंच गया था।
कई गांवों में नहीं पहुंची सहायता
बकेवर। रविवार को भी कुछ लोगों तक कोई सहायता नही पहुंची। ग्राम कछपुरा के रंजीत बताते है उनके गांव में अभी कोई सहायता लोगों को नही मिली। अंदावा की मड़ैया में भी कुछ लोगों तक कोई राहत सामग्री नही पहुंची।
1978 का रिकार्ड तोड़ रही है बाढ़
चकरनगर। चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी जल त्रासदी बनी नदियों की बाढ़ ने ग्रामीणों को समस्याओं के मकड़जाल में फंसा कर छोड़ दिया है। बुजुर्ग बताते हैं कि सन 1978 में नदियों की बाढ़ आई थी। इस बार तो उसका रिकॉर्ड टूट गया।
आधुनिक दौर में भी लोग बाढ़ के अंदर फंसे जिंदगी मौत से संघर्ष कर रहे हैं। चारों तरफ रास्ते बंद है आवागमन ठहर सा गया है। घरों में अंधेरा छाया हुआ है। समस्या ग्रस्त लोग भूखे प्यासे पानी के बीच जिंदगी बचाने की संघर्ष में लगे हुए हैं।
इस तबाही ने चंबल के 10 वर्ष पीछे धकेला
चकरनगर। क्षेत्र में चौथे दिन भी विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। पूरे क्षेत्र में अंधेरा कायम है। लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। चकरनगर क्षेत्र में सन 1970 में विद्युत सब स्टेशन की स्थापना हुई थी।
लोहे के खंभों से होकर हाईटेंशन लाइनों से आज भी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जीर्णशीर्ण पुरानी लाइनें के झूलते तार यमुना के पानी को छू रहे हैं। जिसके चलते विद्युत आपूर्ति बाधित हो रही है।
विभाग के पास कोई ऐसा साधन नहीं है कि वैकल्पिक व्यवस्था से लाइन को ठीक किया जा सके। विद्युत विभाग नदी के पानी कम होने का इंतजार कर रहा है।
विद्युत उपकेंद्र चकरनगर के जेई रचित शर्मा ने एनडीआरएफ की टीम के साथ मोटर वोट से पेट्रोलिंग की। जिसमें 33 केवी लाइन पानी में होने के कारण लाइनों का दुरुस्ती करण करना संभव नहीं हो सका।
बाढ़ पीड़ितों को आयुर्वेद ने दिया सहारा
चकरनगर। जिला आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग और चंबल फाउंडेशन की ओर से चंबल-यमुना में अचानक आई बाढ़ के दौरान चिकित्सा शिविर का आयोजन चकरनगर तहसील के चिंडौली गांव में किया गया।
इस दौरान सैकड़ों बाढ़ पीड़ित ग्रामवासियों को चिकित्सा राहत पहुंचाई गई। डॉ. पूनम गौर ने बताया कि बाढ़ जनित बीमारियों में मुख्य रूप से किशोरियों एवं महिलाओं में त्वचा रोग की होती है लिहाजा साफ-सफाई के साथ हरिद्रा खंड औषधि सबसे लाभकारी है।
चिकित्सा शिविर में शामिल डॉ.लोकेश ने कहा कि बाढ़ के दौरान डायरिया जैसी बीमारियों की अधिकता होती है। इसलिए बाढ़ प्रभावितों को शरीर में पानी की कमी न हो। ओआरएस या चीनी-नमक का घोल समय-समय पर लेने से इससे बचाव होता है।
डॉ.कमल कुमार कुशवाहा ने कहा कि बुखार व विषाणु जनित रोगों से बचने के लिए संसमनी का प्रयोग एवं दशमूल क्वाथ का प्रयोग लाभकारी है। डॉ.धर्मेंद्र ने बताया कि सर्दी व कोविड जैसे लक्षणों से बचने के लिए अणु तेल एवं षडविंदु तेल का प्रयोग कर सकते हैं।
चिकित्सा शिविर में अनेक बीमारियों से बचाव के लिए औषधि के वितरण के साथ आयुष काढ़ा भी वितरित किया गया। चंबल फाउंडेशन के संस्थापक शाह आलम, डॉ.अनिल गिरी, आशुतोष, मधुकर राजपूत का योगदान सराहनीय रहा।
फोटो संख्या 38- बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए लगा आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर- फोटो : ETAWAH