इटावा। यमुना और चंबल की बाढ़ ने जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है। सामान्य जिंदगी पटरी पर लौटने में अभी काफी समय लगेगा। बाढ़ ने जिस तरह से बढ़पुरा और चकरनगर क्षेत्र के 45 गांवों के लोगों को बर्बादी के जख्म दिए हैं उनका भरना आसान नहीं होगा।
ऐसे में प्रदेश सरकार के कबीना मंत्री एवं जिले के प्रभारी सूर्य प्रताप शाही बाढ़ की विभीषिका के शिकार लोगों के बीच पहुंचे। वह पीड़ितों के जख्मों पर लगाने के लिए जो मरहम लाए थे, वह भी कम पड़ गया।
हालात ये बने कि सरकारी राशन सामग्री की इमदाद जरूरतमंदों को नहीं मिल सकी। ग्रामीणों का कहना था कि साहब तो आए परंतु राशन ही कम लाए। इसकी नाराजगी का शिकार लेखपाल को बनना पड़ा। ग्रामीणों ने राशन सामग्री कम होने पर मंत्री के चले जाने के बाद हंगामा किया।
चकरनगर संवाद प्रतिनिधि के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही के दौरे में जितने भाजपा नेता उनके साथ मौजूद थे, उतने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री नहीं मिल पाई।
प्रत्येक बाढ़ प्रभावित गांव में मात्र दस लोगों का चयन राहत सामग्री के लिए किया गया। ऐसे में मात्र 30 लोगों को राहत सामग्री पैकेट वितरण किए गए। मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों से दो दिन के अंदर सभी पीड़ितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कहा।
वह गांव गौहानी में एनडीआरएफ टीम के साथ पहुंचे। उनके साथ विधायक सावित्री कठेरिया, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय धाकरे के साथ जिला स्तरीय क्षेत्रीय भाजपा नेताओं का हुजूम पहुंचा।
यहां से प्रभारी मंत्री ने चंबल क्षेत्र के चोरेला, अनेठा, बिडोरी गांव की दौरे की जानकारी उप जिलाधिकारी चकरनगर से की। चंबल सहसों पुल का एप्रोच मार्च बाढ़ के चलते क्षतिग्रस्त होने से उदी मोड़ मध्य प्रदेश के रास्ते होते हुए मंत्री जी का काफिला बीहड़ी गांव की ओर रवाना हुआ काफिले में भाजपा नेताओं के साथ-साथ जिले का प्रशासनिक अमला साथ रहा है।
मंत्री के आने की सूचना से उत्सुक थे पीड़ित
छह दिन से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे ग्रामीण प्रदेश सरकार के मंत्री आगमन को लेकर बड़े उत्सुक थे। उन्होंने सोचा था कि मंत्री जी आएंगे तो सभी को कुछ न कुछ देकर जाएंगे।
गौहानी गांव में बेघर हुए बाढ़ पीड़ित बरसात के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे पॉलिथीन से ढके टेंट में अपने परिवारों के साथ गुजर बसर कर रहे हैं। मंत्री जी के आने पर दलदल वाले मुख्य मार्ग पर प्रशासन ने कुर्सियां भी डलवाई।
तंबू भी लगवाया। मंत्री जी कहीं नाराज न हो जाएं। मंत्री जी पहुंचे और चुनिंदा बाढ़ पीड़ितों को बुलवाकर उन्हें राहत सामग्री की रस्म अदायगी करके चलते बने। जिसका मौके पर ग्रामीणों विरोध भी किया।
प्रभावित 90, सूची में सिर्फ 50
उदी। चंबल में बाढ़ आने से बढ़पुरा विकास खंड के डूबे गांव का प्रभारी मंत्री ने दौरा किया गया। उन्होंने पीड़ित लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना। यहां मंत्री जी ने 50 लोगों को राहत सामग्री बांटी जबकि वहां जरूरतमंद 90 परिवार थे।
इससे नाराज होकर बसवारा के लोगों ने मंत्री के जाते ही ग्राम प्रधान और लेखपाल का घेराव किया। ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि लेखपाल ने मंत्री जी को जो लिस्ट दी थी।
उसमें केवल गांव के 50 लोगों के नाम दिए गए। जबकि गांव में पीड़ित 90 से अधिक परिवार हैं। लेखपाल ने ऐसे लोगों की सूची बनाई थी, जिनके घर तक पानी में नहीं डूबे।
बसबारा गांव के पवनेश यादव ने बताया कि जिनके घर डूबे थे, उन्हें कुछ नहीं मिला। लेखपाल ने सूची में उनका नाम तो लिखा था पर उसे कोई राहत सामग्री नहीं मिली है। उसने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री जी के सामने उसे लेखपाल ने बोलने नहीं दिया।
बसवारा के ही अरविंद सिंह यादव ने लेखपाल पर आरोप लगाया गया कि जिनके पास सुविधाएं हैं। उनको राहत सामग्री बांटी जा रही है। जिनके पास कोई सुविधाएं नहीं है। उनको राहत सामग्री भी नहीं दी जा रही है।
आंकलन के बाद पीड़ितों की मदद होगी : प्रभारी मंत्री
उदी। बढ़पुरा ब्लाक के बाढ़ से प्रभावित इलाकों का प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक सरिता भदौरिया और डीएम श्रुति सिंह ने निरीक्षण किया। मंत्री ने मड़ैया पछांयगांव, बसबारा, मड़ैया बढ़पुरा, गढ़िया मूलु सिंह के पीड़ित लोगों को खाद्य सामग्री भी वितरित की।
इसके बाद मंत्री ने कहा कि जिन गांवों में पानी ज्यादा भर गया है। वहां पर नाव और स्टीमर की व्यवस्था की गई है। जनपद में करीब 40 गांव से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जिनमें से 10 या 12 गांव में ज्यादा पानी पहुंच गया है। फसल का नुकसान हुआ है उसका अभी सर्वे कराया जा रहा है। आंकलन के हिसाब से लोगों को सरकार से संभव मदद दिलाई जाएगी।
बाढ़ की निगरानी के लिए हर 5 गांव पर एक मजिस्ट्रेट की तैनाती, एनडीआरएफ, पीएसी बल को तैनात किया गया है। जिससे गांव वालों को काफी राहत पहुंच रही है।
बाढ़ से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों का भी गठन किया गया है। इसके साथ ही पशुपालन विभाग की टीम भी बाढ़ क्षेत्र में मवेशियों का ख्याल रख रही हैं।
ग्रामीणों की जुबानी बाढ़ की कहानी
वीर सिंह बताते हैं कि जैसे तैसे एक पक्का कमरा बना कर तैयार किया था। ताजा निर्माण होने के कारण बाढ़ में बह गया। अब पक्का मकान बनाना आसान नहीं।
कल्लू बताते हैं कि छह दिन हो गए चार बार खाना मिला है। बाढ़ में घर डूब जाने से सब कुछ बर्बाद हो गया। अब तो न खाने को रोटी है, और न ही सोने के लिए कहीं बिस्तर।
रणवीर सिंह कहते हैं कि बाढ़ में भले ही कितनी राहत बट रही हो लेकिन राहत नसीब वाले व चमचों को मिलती है। हम लोग भूख प्यास से परेशान हैं। जीवन नर्क बन गया है।
महावीर कहते हैं कि प्रशासन केवल पानी से निकालकर खुले में छोड़ रहा है। क्षेत्र में इतनी बड़ी त्रासदी कभी नहीं हुई चारों तरफ तबाही में मची है। कोई रिश्तेदार भी मदद के लिए नहीं आ रहा है।
अर्जुन सिंह कहते हैं कि उनके बचपन में सन 1978 में जिन नदियों में बाढ़ आई थी। उसका भी रिकॉर्ड टूट चुका है। उन दिनों जो हालात पैदा हुए थे। आज उससे ज्यादा खराब हालात पैदा हो रहे हैं।
नरेंद्र सिंह कहते हैं कि अपने बच्चों के लिए जुगाड़ करके खाने पीने की व्यवस्था की है। सरकारी तौर पर मुझे आज तक एक दाना तक नहीं मिला है।
फोटो संख्या 26- ग्राम गोहानी में बाढ़ से बेघर परिवार ने पालिथीन की छत बनाकर बनाया आसरा- फोटो : ETAWAH
फोटो संख्या 24- बढ़पुरा के बाढ़ प्रभावित गांवों में पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित करते प्रभारी ?- फोटो : ETAWAH