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ग्यारह ब्लैक स्पॉट... तीन साल में 331 ने गंवाई जान

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इटावा। जिले में शायद ही ऐसा को दिन हो, जब सड़क हादसे में किसी न किसी की जान जाती हो और हाथ-पैर न टूटते हो। कई चौराहे व रास्ते हादसों के लिए प्रसिद्ध हैं।
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यहां आए दिन ऐसे हादसे होते हैं, जिसमें एक नहीं कई लोगों की एक साथ जान गंवानी पड़ती है। वर्ष 2020 में इन ब्लाक स्पॉट में 70 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि सौ के आसपास लोग घायल भी हुए।
जिले के ऐसे 11 स्थानों को ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना बहुल क्षेत्र) के रूप में पुलिस और उप संभागीय विभाग ने चिह्नित किया है। इनमें जसवंत नगर का मलाजनी चौराहा, बस स्टैंड तिराहा, शहर के सिविल लाइन स्थित आईटीआई चौराहा, इकदिल थाना क्षेत्र का मानिकपुर मोड, इकदिल तिराहा, बकेवर क्षेत्र स्थित गोमती पेट्रोल पंप के पास, लखना तिराहा, ऊसराहार क्षेत्र की कछपुरी पुलिया, समथर बंबा, वैदपुरा क्षेत्र का वैदपुरा चौराहा और सैफई चौराहा शामिल हैं।
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वैसे हादसे तो किसी भी सड़क या गली में हो सकते हैं, लेकिन हाईवे पर ज्यादा ही जानलेवा हादसे होते हैं। जहां बड़े हादसे हो और भविष्य में भी ऐसी संभावनाएं रहती हो, उनकी ब्लैक स्पॉट के रूप में पहचान की जाती है। वहां खास व्यवस्थाएं की जाती है।
संकेत बोर्ड लगाकर चालकों को सचेत किया जाता है। स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं। सड़क की डिजाइन को ठीक कराया जाता है। सड़क की मरम्मत व चौड़ीकरण आदि काम भी कराया जाता है।
उपसंभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो चिह्नित ब्लैक स्पॉट वाले स्थानों पर वर्ष 2020 में 70 लोगों ने अपनी जान गवाईं, जबकि 100 से अधिक लोग हादसों का घायल हुए।
वर्ष 2019 में सड़क हादसों में 145 लोगों की जान गई थी, जबकि वर्ष 2018 में 116 लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी थी। यानी तीन वर्षों में लगभग 331 लोगों को सड़क हादसों में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
परिवहन विभाग, पुलिस, निर्माण एजेंसियां, स्वास्थ्य विभाग समेत छह विभागों की ज्वाइंट कमेटी बनाकर एक्शन प्लान तैयार किया गया है,। ताकि ब्लैक स्पॉट की खामियों को दूर कर हादसों की संख्या में कमी लाई जा सके।
कट खुला, स्पीड ब्रेकर भी नहीं
जसवंतनगर के हाईवे पर मलाजनी गांव में डिवाइडर का कट खुला होने की वजह से हादसे हो रहे हैं। डिवाइडर व सड़क के दोनों तरफ रेलिंग भी नहीं लगी है। डिवाइडर की दीवार तीन इंच ऊंची है और कट से छोटे वाहन इधर से उधर क्रास होते हैं।
दुर्घटना बहुल क्षेत्र संबंधी संकेतक भी नहीं लगे हैं। उधर, जसवंत नगर के बस स्टैंड चौराहा पर हादसे वजह वहां बना फ्लाई ओवर, दोनों की साइड रोड है। फ्लाई ओवर के दोनों तरफ व साइड रोड पर पुराने संकेतक लगे हैं।
साइड रोड से फ्लाई ओवर पर चढ़ने व उतरने के दौरान स्पीड ब्रेकर न होने से लोग तेज गति से चालक वाहन लेकर निकलते हैं। यहां स्पीड ब्रेकर का निर्माण कराने की जरूरत है। फ्लाई ओवर बनने के बाद यहां हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है।
नहीं लगे हैं संकेतक
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के आईटीआई चौराहा के पास इटावा-मैनपुरी और इटावा-आगरा हाईवे के पास फ्लाई ओवर बना है। साइड रोड दोनों तरफ बनी है, लेकिन वहां स्पीड ब्रेकर और संकेतक नहीं हैं। ऐसे में लोग तेज रफ्तार से वाहन लेकर आते हैं। यही हादसे की मुख्य वजह बनते हैं।
मानिकपुर के मोड़ पर लगता जाम
इकदिल थाना क्षेत्र स्थित मानिकपुर मोड के पास से इटावा-ग्वालियर और कानपुर-आगरा हाईवे गुजरा है। हाईवे के पास फ्लाई ओवर व साइड में दोनों तरफ सड़क है, लेकिन स्पीड ब्रेकर नहीं है।
यहां पर फ्लाई ओवर पर वाहन चढ़ते और उतरते हैं। दोनों तरफ से वाहन तेज गति से आते हैं, स्पीड ब्रेकर न होने से वाहनों की गति कम नहीं होती है। इससे हादसे होते हैं। शहर की तरफ साइड रोड पर वाहनों के आवागमन के चलते मानिकपुर मोड़ पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
इकदिल चौराहे की चौड़ाई कम
इकदिल क्षेत्र के ही इकदिल चौराहा की चौड़ाई कम है। पास ही फ्लाईओवर बन गया है। फ्लाई ओवर के दोनों तरफ सड़क तो बनी है, लेकिन चौड़ाई कम है। साइड रोड से फ्लाई ओवर पर चढ़ने व उतरने के दौरान सड़क स्पीड ब्रेकर नहीं होने से तेज रफ्तार से वाहन आते है, जिससे हादसे होते हैं।
पत्थरों के बीच से निकलते हैं लोग
बकेवर क्षेत्र स्थित गोमती पेट्रोल पंप के पास नेशनल हाईवे के नजदीक बने डिवाइडर के कट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, लेकिन के बीच में रखे पत्थरों के बीच में खाली जगह से लोग बाइक व अन्य दुपहिया वाहन लेकर रोड पार करते है।
इस वजह से दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है। दुघर्टना बहुल का संकेतक और रेलिंग नहीं लगी है।
रेलिंग और सड़क की चौड़ाई कम
ऊसराहार क्षेत्र स्थित समथर बंबा की पुलिया संकरी है। यहां बनी रेलिंग की दीवार की ऊंचाई कम है और एक दीवार भी आधी टूटी हुई है। पुलिया के पास स्पीड ब्रेकर नहीं है।
दुघर्टना बहुल का संकेतक नहीं लगे हैं। उधर, बकेवर क्षेत्र का लखना तिराहा के पास सड़क की चौड़ाई कम है। यहां से गुजरे तीनों रास्तों पर स्पीड ब्रेकर नहीं है। दुघर्टना बहुल का संकेतक नहीं लगा है।
ऊसराहार क्षेत्र स्थित कछुपुरी पुलिया सकरी, पुलिया पर बनी रेलिंग की दीवार की ऊंचाई कम है। पुलिया के पास स्पीड ब्रेकर नहीं है। दुघर्टना बहुल का संकेतक भी नहीं लगा है।
नहीं बना है चौराहा
वैदपुरा क्षेत्र के वैदपुरा चौराहा पर मैनपुरी व इटावा दोनों तरफ मार्ग पर स्पीड ब्रेकर नहीं है। साइड रोड से फ्लाई ओवर पर चढ़ने व उतरने के लिए जरूरी स्पीड ब्रेकर नहीं है।
चौराहे के चारों तरफ दुकानें लगती हैं, लेकिन रेलिंग नहीं है। ग्राहक रोड पर ही वाहन खड़ा का सामान खरीदते है, जिससे दुघर्टना की स्थिति बनी रहती है। यहां चौराहा भी नहीं बना है।
चौराहा है, पर संकेतक नहीं
सैफई चौराहा पर चारों तरफ सड़क स्पीड ब्रेकर सहीं तरीके से नहीं बने हैं। यहां चौराहा तो बना है, लेकिन दुघर्टना बहुल के संकेतक नहीं लगे हैं।
रोड सेफ्टी एक्शन प्लान तैयार कर ब्लैक स्पॉट को सुधारने का काम किया जाता है। जिले में 11 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनके सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार कर प्रशासन को भेजी गई है।
अनुमति व बजट मिलने के बाद ही इन स्थानों पर काम कराया जाएगा, ताकि हादसों की संख्या में कमी आ सके। साथ ही इस साल कुछ नए ब्लैक स्पॉट भी चिह्नित किए जाएंगे। पुराने ब्लैक स्पॉट की खामियों को ठीक कराए जाने के बाद उन्हें ब्लैक स्पाट की सूची से हटा दिया जाएगा।
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-बृजेश कुमार, एआरटीओ, इटावा
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