Such a passion for teaching, left the selection of PCS
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चित्रकूट। जिले के लठगुठऊपुर गांव निवासी संतोष कुमार सिंह को छात्रों को पढ़ाने की ऐसी धुन सवार हुई कि पीसीएस में चयन होकर नायाब तहसीलदार बने लेकिन इस नौकरी को छोड़ दिया। शिक्षण कार्य को पूजन की तरह मानते हुए दस साल से जर्जर भवन वाले पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंधोइन में बालकों को पूर्ण शिक्षित बनाने का काम पूर्ण जिम्मेदारी से कर रहे हैं। उनके पढ़ाए सैकड़ों बच्चे दिल्ली, मुंबई व अन्य जिलों में सरकारी सेवा में हैं।
साल 1997 में संतोष कुमार सिंह का शिक्षक के रूप में चयन हुआ तो गांव से मुख्यालय कर्वी आ गए। पढ़ाई की रुचि होने पर 1999 में पीसीएस में चयन हुआ तो झांसी में नायब तहसीलदार बन गये। 2001 तक नायब तहसीलदार रहे लेकिन इनका मन नहीं लगा। इसके बाद 2001 अल्पसंख्यक समाज कल्याण अधिकारी पद पर भी चयन हुआ लेकिन शिक्षक बनने की धुन ऐसी रही कि इसे ज्वाइन ही नहीं किया। इसके बाद 2007 से शिक्षण कार्य में फिर जुटे और अब दस साल से उच्च प्राथमिक विद्यालय बंधोइन में सहायक अध्यापक हैं। उनका कहना है कि बच्चों को सही शिक्षा देकर आगे बढ़ाने से देश का भला होगा। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
ऐसे बनाई पहचान
कोरोना काल में ऑनलाइन निशुल्क शिक्षण कार्य किया। प्रदेश भर के स्कूल के छात्रों व शिक्षकों का व्हाटसअप ग्रुप बनाकर पढ़ाई के साथ ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं कराईं। दृष्टिबाधित बालिकाओं को लगातार एक माह तक कैरियर कोचिंग निशुल्क दी। गरीब बच्चों को प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए निजी खर्च कर फार्म भरवाते हैं। उन्हें शिक्षण कार्य के बाद घर में निशुल्क कोचिंग भी देते हैं।