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बागवानी करने वाले किसान होते खुशहाल

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Happiness came from gardening, now showing the way - फोटो : BANDA
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चित्रकूट। बागवानी से अच्छी आमदनी कर रहे किसानों को किसान मेला में सम्मानित किया गया। प्रगतिशील किसानों ने खेती-किसानी से अपने अनुभवों को अन्य किसानों से साझा किया। दूसरे किसानों को भी परंपरागत खेती छोड़कर बागवानी करने की सलाह दी। मेले का आयोजन एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत जिला उद्यान्न प्रसंस्करण विभाग ने कराया है।
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शहर से सटे कालपुर स्थित मंदाकिनी भवन में कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सांसद आर के सिंह पटेल ने कहा कि जो किसान बागवानी करते हैं वह किसान अधिक खुशहाल है। किसानों को फलों की बागवानी करना चाहिए। इसके लिए सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी दी जाती है। परंपरागत खेती को छोड़कर अब किसानों को नए स्तर से खेती करना चाहिए।
कार्यक्रम में जिला उद्यान अधिकारी डा. बल्देव प्रसाद ने उद्यान विभाग से चलने वाली योजनाओं की जानकारी दी। महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डा. शिव शंकर सिंह, दुग्गल, मौसम वैज्ञानिक डा. मनोज शर्मा ने सब्जी की खेती करने सहित पशु पालन, मशरूम तैयार करने की जानकारी दी। संचालन शिव कुमार शुक्ला ने किया।
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इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ल, हिमांशु पांडेय, आरपी त्रिपाठी, योगेश जैन, दरियाव सिंह आदि मौजूद रहे। कृषि संबंधी प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जिसमें किसानों द्वारा तैयार फल और इसके उत्पादन के तरीके बताए गए ।
ये हुए सम्मानित
चित्रकूट। दो दिवसीय किसान मेला में मेवालाल निवासी कालूपुर पाही टमाटर, बरमदीन मूली, शिवनारयण अकबरपुर बैगन, बुद्धराम सेमरामऊ प्याज, जगन्नाथ निवासी डिलौरा गुलाब, हरीप्रसाद गोबरिया गेंदा, रामनरेश गढ़वा मिर्च, भूपत पत्ता गोभी, अंबिका प्रसाद देवरा मशरूम बदलू प्रसाद सीतापुर ग्रामीण आलू की पैदावार के लिए सम्मानित किया गया।
किसानों को ऐसे मिली सफलता
चित्रकूट। सदर विकास खंड के सीतापुर गांव के किसान बदलू प्रसाद ने बताया कि वह पहले गेहूं आदि की खेती करते थे। जिसमें लागत और समय दोनों अधिक लगता था। मौसम पर निर्भर पड़ता था। अब कई सालों से आलू की खेती करते है। जिसकी बुआई अक्तूबर व नवंबर माह में होती है। इस वर्ष पांच बीघा में लगाया है। एक बीघा में 15 हजार रुपये तक खर्च हो जाते है। लगभग 50 हजार आमदनी होती है। अंबिका प्रसाद निवसी सेमरा ने बताया कि वह उद्यान विभाग में प्रशिक्षण लेकर मशरूम तैयार करने कार्य करता है। एक कमरे में खाद व भूसे में इसकी पैदावार होती है। तैयार होने वाले मशरूम को एफपीओ का संचालन करने वाले ले जाते है। बरवारा गांव के किसान बरमदीन ने बताया कि वह सब्जी लगाने के साथ ही पौधे तयार कर बेचने का कार्य करता है। जिसमें पिछले साल 50 हजार पौधे तैयार किया था। इस कार्य में अच्छी आमदनी है।
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