बुलंदशहर देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव जटापुर में ससुराल में रह रहे रेशमपाल की हत्या के मामले में उसकी बेटी की गवाही के आधार पर कोर्ट ने पत्नी संतोष और उसके प्रेमी राजू उर्फ राजकुमार को दोषी माना है। एडीजे पंचम नीलम ढाका की पीठ ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
सजा सुनाते समय कोर्ट ने टिप्पणी की कि कोई भी पुत्री अपनी मां से बहुत प्रेम करती है। मां के खिलाफ झूठा बयान नहीं दे सकती है। बेटी के सामने मां और उसके प्रेमी द्वारा पिता की हत्या करना जघन्य अपराध है। साथ ही यह पारिवारिक संबंधों को क्षीण करता है। इसलिए ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा देना न्यायोचित है।
यह था मामला
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंद्रभान सिंह ने बताया कि खुर्जा देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव अच्छेजा घाट निवासी सूरजपाल सिंह ने 19 नवंबर 2016 को कोतवाली देहात बुलंदशहर में तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि उनके पुत्र रेशमपाल की शादी कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव जटापुर निवासी महिला संतोष के साथ हुई थी।
शादी के कुछ दिन बाद से ही करीब 18 वर्ष पूर्व उनका पुत्र रेशमपाल पत्नी के साथ जटापुर स्थित अपनी ससुराल में जाकर रहने लगा था। पीड़ित ने बताया था कि 18 नवंबर को वह अपने बेटे से मिलने जटापुर गया था, लेकिन रातभर न तो उसका पुत्र रेशमपाल घर लौटा और न ही पुत्रवधू संतोष घर आई।
19 नवंबर की सुबह जब वादी खेत पर शौच के लिए गया था उनके पुत्र रेशमपाल का शव वहां पड़ा हुआ था। पीडि़त की शिकायत पर पुलिस ने मृतक की पत्नी संतोष व उसके प्रेमी राजू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी।
यह गवाह हुए पेश
मामले में वादी पक्ष की ओर से सूरजपाल सिंह वादी, मनु मृतक की पुत्री, कांस्टेबल बनी सिंह, उपनिरीक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. फूल सिंह, निरीक्षक भूपेंद्र सिंह, फील्ड यूनिट प्रभारी सुरेंद्र कुमार, अमरेश कुमार बघेल तत्कालीन निरीक्षक की गवाही कराई गई। जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।