फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर में कूड़ा जलना बंद हो तो हवा की गुणवत्ता सुधरे

विज्ञापन
शहर में नई सराय पुलिस चौकी के पास जलता कूड़ा। संवाद - फोटो : BADAUN
विज्ञापन
बदायूं। नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर की हवा में लगातार जहर घुल रहा है। दिवाली की आतिशबाजी के दो दिन के बाद भी शहर में तमाम स्थानों पर कूड़े के ढेरों से उठ रहा धुआं वायु की गुणवत्ता को खराब कर रहा है। शनिवार को बदायूं में वायु का एक्यूआई 300 के पार होने का एक प्रमुख कारण यह भी रहा। रविवार को भी एक्यूआई में सुधार नहीं हुआ।
विज्ञापन

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) यानी वायु की गुणवत्ता की बात करें तो बदायूं की वायु लगातार दूषित हो रही है। तापमान कम होने के साथ वायुमंडल की पृथ्वी से दूरी कम हो रही है। ऐसे में उत्सर्जित हानिकारक गैसें और प्रदूषक तत्व पीएम 2.5, पीएम 10 वायु मंडल में ज्यादा ऊपर नहीं पहुंच पा रहे। इस कारण धुंध भी छा रही है। कई दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और दिवाली पर शहर में तमाम स्थानों पर कूड़े के ढेरों में लगाई गई आग ने भी हवा में जहर घोलने का काम किया है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम ने बताया प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एप पर रविवार को जारी आंकड़ों पर गौर करें तो बदायूं का एयर क्वालिटी इंडेक्स अब भी 300 के आस-पास बना हुआ है।
-
पराली से ज्यादा खतरनाक है कूड़ा जलाना
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने से कहीं ज्यादा खतरनाक कूड़ा जलाना है। कूड़े के ढेरों में पराली से ज्यादा हानिकारक तत्व होते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को भी कूड़े के ढेरों का संज्ञान लेना चाहिए। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि इन दिनों सेटेलाइट से मिल रहीं सूचनाओं पर गौर करें तो एनसीआर के आस-पास के इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब है। वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण एनसीआर से सटा बुलंदशहर और बदायूं भी रेड जोन में जा रहा है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें