बदायूं। मच्छरों की दुश्मन गंबूसिया मछली की मलेरिया, डेंगू के सीजन में मांग बढ़ गई है। मच्छरों और लार्वा को अपना भोजन बनाने वाली इस मछली की सप्लाई बदायूं से मथुरा, फिरोजाबाद, हापुड़, सहारनपुर, अलीगढ़, एटा, टूंडला, मैनपुरी आदि जिलों में हो रही है। गंबूसिया मछली जिस तालाब में होती है वहां मच्छर और लार्वा नहीं पनपते। जगत ब्लॉक के गांव ईकरी में इस मछली का पालन होता है। तालाब स्वामी जियाउल उस्मान स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग को निशुल्क मछली उपलब्ध करा रहे हैं।
जगत ब्लॉक के ईकरी निवासी सलीम खान ने वर्ष 2016 में मछली पालन का काम शुरू किया था। अब यह काम उनके बेटे जिया उल उस्मान देखते हैं। उनके पास करीब 29 प्रजातियों की मछली हैं। मछलियों का बीज वह कोलकाता से लाए थे। इनमें गंबूसिया मछली भी आ गई। उस वक्त तक इस मछली का बदायूं में पालन नहीं होता था। वर्ष 2018 से जिले में मलेरिया का प्रकोप शुरू हो गया।
2019 में तो मलेरिया के प्रकोप के मामले में बदायूं प्रदेश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया था। गांवों के तालाबों, गड्ढों में भरे पानी में मच्छर और लार्वा खत्म करने के लिए स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग को गंबूसिया मछली की याद आई। इस मछली की तलाश की गई तब मालूम हुआ कि ईकरी के तालाबों में यह मछली है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मछली को गांव-गांव तालाबों में छुड़वाना शुरू कर दिया। तालाबों और गड्ढों में गंबूसिया छुड़वाने के बाद मलेरिया के मामलों में कमी आने लगी।
इन दिनों बदायूं से गंबूसिया मछली की सप्लाई मलेरिया और डेंगू प्रभावित प्रदेश के कई जिलों में हो रही है। खासकर मथुरा, फिरोजाबाद, हापुड़, सहारनपुर, अलीगढ़, एटा, टूंडला, मैनपुरी आदि जिलों के लिए बदायूं से मछली भेजी जा रही है। तालाब स्वामी स्वास्थ्य विभाग को मुफ्त में मछली उपलब्ध करा रहे हैं।
खाने के काम नहीं आती गंबूसिया मछली
- विशेष प्रजाति के गंबूसिया मछली काफी छोटी होती है। इसका भोजन के रूप में उपयोग नहीं होता। यह मछली तेजी से प्रजनन करती है। एक तालाब में 50 से 100 मछलियां छोड़ी जाती हैं। जिले में कई ऐसे तालाब भी हैं जहां पिछले वर्ष मछली छोड़ी गई थी अब इन तालाबों में मछलियों की संख्या काफी ज्यादा है।
तालाब स्वामी जिया उल उस्मान की मानें तो अब तक वह बदायूं समेत कई जिलों में करीब 80 लाख मछलियां भेज चुके हैं। इन दिनों प्रदेश भर के इन जिलों में गंबूसिया मछली की काफी मांग है जहां मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है।