बदायूं। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत शुक्रवार को श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज में ‘हिंदी की उपयोगिता और जनजीवन में अंग्रेजी का महत्व’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। पक्ष में बोलने वाले प्रतिभागियों ने कहा कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पूरे देश को एकजुट किया था। यह एक समर्थ भाषा है।
इस वाद विवाद प्रतियोगिता का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य संदीप भारती ने मां शारदे के समक्ष दीप जलाकर किया। अध्यक्षता प्रवक्ता राजेंद्र कुमार ने की। विद्यालय के 11 वीं के छात्रों के दो समूह बनाकर संवाद कराया गया। पक्ष में बोलने वाले छात्रों ने कहा कि हिंदी में भारत की आत्मा बसती है। यही वजह है कि अगर आप पूरे देश से संवाद करना चाहते हैं तो हिंदी से कारगर कुछ भी नहीं है।
छात्र मंजीत सिंह ने कहा कि जो हिंदी से प्यार करते हैं वह हर क्षेत्र में अच्छी अभिव्यक्ति के बूते चयनित होते हैं और सराहे जाते हैं। छात्र मनोज ने कहा कि हिंदी भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। राष्ट्र की एकता एवं समग्रता के विकास में हमें हिंदी का प्रयोग बढ़-चढ़कर करना चाहिए।
वहीं, अंग्रेजी के पक्ष में छात्र सुमित और विमल ने तर्कपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। अंत में हिंदी की पैरवी करने वालों का मोर्चा मजबूत रहा। अंग्रेजी की वकालत करने वाले छात्र भी आखिर में इस पर सहमत हुए कि हिंदी को छोड़कर अंग्रेजी या दूसरी भाषाओं को आत्मसात करना सही नहीं है। हिंदी भारतीयों की प्रथम वरीयता की भाषा होनी चाहिए।
पक्ष : हिंदी देश की पहचान
किसी भी देश की पहचान उसकी भाषा से होती है। हमारे देश की पहचान हिंदी से हैं। इसलिए भारत को हिंदुस्तान भी कहा जाता है। आज के युग में कुछ लोग अंग्रेजी भाषा को वरीयता देते हैं, जो सही नहीं है। भारतीयों को हिंदी को प्रथम भाषा मानकर उसके प्रचार प्रसार के लिए काम करना चाहिए। - राहुल शर्मा
हमें अपनी भाषा और संस्कृति को लेकर संकोच नहीं करना चाहिए। हम भारतीय हैं और देश के अधिकांश भू-भाग में हिंदी किसी न किसी रूप में बोली जाती है। अपनी भाषा का सम्मान करना भी एक तरह की देशभक्ति ही है। मैं हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करता हूं, इस बात पर मुझे गर्व है। हां, हमें दूसरी भाषाओं का अनादर भी नहीं करना चाहिए। - श्याम कुमार
विपक्ष : अंग्रेजी भी जरूरी क्योंकि ...
अगर आप देश के बाहर जाते हैं तो आपको अंग्रेजी का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। मेरा मानना है कि भारत के बाहर मौजूदा समय में सीमित लोग ही हिंदी जानते होंगे। इसलिए अंग्रेजी ज्ञान गलत नहीं है। हां यहां मेरा मंतव्य हिंदी भाषा को हल्के में लेने का नहीं है। हिंदी हमें सबसे प्यारी है। यह हमारे व्यवहार की भाषा है। - सुमित सक्सेना
आज के दौर में अंग्रेजी का महत्व बढ़ गया है। अगर आप कहीं नौकरी करने जाते हैं तो आपसे अंग्रेजी ज्ञान के बारे में पूछा जाता है। कंप्यूटर से होने वाले अधिकांश कार्यों का माध्यम अंग्रेजी ही है। यह तो सरकार को चाहिए कि वह कंप्यूटर कार्य, विभिन्न विभागों के कामकाज को हिंदी में कराने पर जोर दे। वैसे हमें हमारी हिंदी भाषा दिलोजान से प्यारी है। - विमल शाक्य, छात्र