बदायूं। केंद्र व प्रदेश की सरकार वर्षों से कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रही है। इसके तहत मासूमों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। उनमें से एक पोषाहार योजना है जो कुछ समय से दलालों की भेंट चढ़ती जा रही है। हकीकत में जिन महिलाओं और बच्चों को पोषाहार मिलना चाहिए ये पोषाहार उन तक नहीं पहुंच रहा है। इसका स्वरूप बदलकर बाजार में अवैध रूप से बिक्री किया जा रहा है।
जिले में हाल ही में बिल्सी और बिसौली इलाके से बाल पोषाहार पकड़ा जा चुका है। कुछ समय पहले बिल्सी में सरकारी सोयाबीन का तेल लाया गया था। ये तेल माफिया के पास पहुंचता उससे पहले बिल्सी पुलिस ने पकड़ लिया। इतना ही नहीं इसमें तीन लोग भी पकड़े गए थे और उन्हें जेल भेजा गया। उनमें एक स्थानीय निवासी था। वह स्थानीय स्तर पर सोयाबीन के तेल की अवैध बिक्री कर रहा था। इसमें आज तक ये पता नहीं चला कि वह सोयाबीन का तेल कहां से लाए। उन्हें किसने ये सरकारी सोयाबीन का तेल बेंचा था। इसके अलावा दो दिन पहले बिसौली के एक गोदाम से बाल पोषाहार पकड़ा गया। इसमें गोदाम मालिक नजाकत मंसूरी और चौकीदार दिनेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है लेकिन अभी तक इसका खुलासा नहीं हुआ है कि आखिर 350 कट्टे बाल पोषाहार कहां से लाया गया था। इसे कौन लाया था। कहीं न कहीं इसमें बाल विकास विभाग के कर्मचारी या अधिकारी शामिल हैं। इससे भारी मात्रा में बाल पोषाहार अवैध बिक्री किया जा रहा है।
मुजरिया में माफिया कर चुका है सीडीपीओ पर हमला
- जिले में बाल पोषाहार का धंधा करने वाले माफिया की जड़ें फैल चुकी हैं। करीब छह माह पहले सीडीपीओ पर हमला करने का मामला सामने आया था। सीडीपीओ सहसवान से जिला मुख्यालय मीटिंग में जा रहे थे। इसी दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इस संबंध में पुलिस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा चुकी है।
बच्चों और महिलाओं तक नहीं पहुंचता पूरा पोषाहार
जिले में बाल पोषाहार अवैध बिक्री की एक वजह ये है कि ये बच्चों और महिलाओं तक पूरा नहीं पहुंचता। कभी उन्हें मिल जाता है तो कभी अगले माह गायब कर दिया जाता है। इससे कहीं ने कहीं ग्रामीण स्तर से भी बाल पोषाहार की चोरी हो रही है।
अब तक जिले में दो जगह बाल पोषाहार पकड़ा जा चुका है। बिल्सी में पकड़ा गया बाल पोषाहार शाहजहांपुर से आया था। ये तो पता चल गया है कि लेकिन बिसौली में कहां से आया है। इसकी जांच चल रही है। इसमें हमें भी शक हो रहा है कि कहीं न कहीं विभाग का कोई कर्मचारी जरूर शामिल है। इससे इतनी ज्यादा मात्रा में बाल पोषाहार लाया जा रहा है। - आदीश मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग