बिजनौर। मानसिक बीमारियों से पीड़ित झाड़-फूंक और टोटकों में फंसकर खूब पैसा लूटा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति शिविर लगाकर और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक कर रहा है। अब मेडिकल अस्पताल में लगातार इन मरीजों की संख्या बढ़ी है।
मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोज लगभग 120 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। चिकित्सकों के अनुसार इनमें ज्यादातर मरीज नींद न आना, तनाव के कारण गलत विचार आना, डिप्रेशन, दौरे आना आदि बीमारियों से पीड़ित होते हैं। मरीजों की स्थिति के अनुसार दवाओं के साथ काउंसलर द्वारा इनकी काउंसिलिंग कराई जाती है।
केस-1
चांदपुर निवासी मरीज राहुल ने बताया कि वह डर, बेचैनी और गुस्से से परेशान था। उसके परिजन उसे एक तांत्रिक के पास ले गए। वहां ताबीज और धुएं से झाड़ा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जब हालत और भी खराब हो गई, तब वह अस्पताल लाया गया। अब दवाइयां और काउंसिलिंग से धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
केस 2
मंडावर निवासी कविता ने बताया कि उसे नींद न आने के साथ ही गलत विचार आते थे। किसी रिश्तेदार ने ऊपरी हवा बताते हुए एक व्यक्ति से झाड़-फूंक की सलाह दी। उसने कुछ कार्य बताते हुए एक महीने में आठ हजार रुपये भी ले लिए लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद मनोरोग विशेषज्ञ के पास आए। तब से हालत में सुधार है।
केस 3
बिजनौर शहर निवासी यामीन ने बताया कि उसके बेटे को दौरे पड़ने की बीमारी है। छह महीने तक झाड़- फूंक के चक्कर में आकर स्थिति को और बिगाड़ लिया। उसके बाद चिकित्सक का परामर्श लिया।
मरीज के साथ सभी होते हैं प्रभावित : डाॅ. नितिन
चिकित्सक डॉ. नितिन बताते हैं कि मानसिक बीमारियों का उपचार सही समय पर न होना केवल मरीज ही नहीं बल्कि पूरे परिवार की दिनचर्या को प्रभावित कर देता है। आमतौर पर मिर्गी, हिस्टीरिया जैसी बीमारी होने पर लोग झाड़-फूंक कराने जाते हैं। तीमारदार किसी बहकावे में न आकर सही समय पर इलाज करा लें तो मरीज जल्दी ठीक हो सकता है।